Infographic illustration titled 'YOUTH & NEW EDUCATION POLICY (NEP 2020): INDIA'S FUTURE ROADMAP', showing diverse Indian youth using technology alongside a pathway of policy reforms like the 5+3+3+4 structure and skill development leading to national progress.

युवा और नई शिक्षा नीति Youth and the New Education Policy (NEP 2020)

प्रस्तावना:

किसी भी राष्ट्र की प्रगति उसके युवाओं की ऊर्जा और उनकी शिक्षा की गुणवत्ता पर निर्भर करती है। भारत वर्तमान में ‘डेमोग्राफिक डिविडेंड’ (जनसांख्यिकीय लाभांश) के दौर से गुजर रहा है, जहाँ दुनिया की सबसे बड़ी युवा आबादी यहाँ निवास करती है। इस क्षमता को सही दिशा देने के लिए 29 जुलाई 2020 को भारत सरकार द्वारा राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 को मंजूरी दी गई। यह 34 साल पुरानी शिक्षा नीति (1986) का स्थान लेती है।

1. ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

एग्जाम में अक्सर पुरानी नीतियों के बारे में पूछा जाता है:

  • पहली शिक्षा नीति: 1968 (इंदिरा गांधी सरकार)।
  • दूसरी शिक्षा नीति: 1986 (राजीव गांधी सरकार)।
  • संशोधन: 1992 में (पी.वी. नरसिम्हा राव सरकार)।
  • तीसरी शिक्षा नीति: 2020 (कस्तूरीरंगन समिति की सिफारिश पर)।

Key Fact: NEP 2020 का मसौदा तैयार करने वाली समिति के अध्यक्ष डॉ. के. कस्तूरीरंगन (पूर्व इसरो प्रमुख) थे।

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2. शिक्षा नीति का नया ढांचा: 5+3+3+4 पद्धति

पुरानी नीति के 10+2 ढांचे को बदलकर अब 5+3+3+4 कर दिया गया है। इसे समझना युवाओं और छात्रों के लिए अत्यंत आवश्यक है:

  1. Foundational Stage (5 वर्ष): 3 साल आंगनवाड़ी/प्री-स्कूल + कक्षा 1 और 2 (आयु 3-8 वर्ष)। इसमें खेल-कूद आधारित शिक्षा पर जोर है।
  2. Preparatory Stage (3 वर्ष): कक्षा 3 से 5 (आयु 8-11 वर्ष)। इसमें भविष्य के लिए बुनियादी साक्षरता और संख्यात्मक ज्ञान तैयार करना है।
  3. Middle Stage (3 वर्ष): कक्षा 6 से 8 (आयु 11-14 वर्ष)। यहाँ से कोडिंग और व्यावसायिक प्रशिक्षण (Vocational Training) शुरू होगा।
  4. Secondary Stage (4 वर्ष): कक्षा 9 से 12 (आयु 14-18 वर्ष)। विषयों को चुनने की आजादी (No Rigid Streams) और आलोचनात्मक सोच पर ध्यान।

3. उच्च शिक्षा में क्रांतिकारी बदलाव

युवाओं के लिए उच्च शिक्षा के दरवाजे अब और अधिक लचीले बनाए गए हैं:

  • Gross Enrolment Ratio (GER): सरकार का लक्ष्य 2035 तक उच्च शिक्षा में GER को 50% तक ले जाना है (वर्तमान में यह लगभग 27% है)।
  • Multiple Entry and Exit System: यह युवाओं के लिए सबसे बड़ा वरदान है।
    • 1 साल बाद छोड़ने पर: Certificate
    • 2 साल बाद छोड़ने पर: Advanced Diploma
    • 3 साल बाद छोड़ने पर: Bachelor’s Degree
    • 4 साल बाद छोड़ने पर: Bachelor’s with Research
  • ABC (Academic Bank of Credits): डिजिटल रूप से छात्रों के क्रेडिट स्टोर किए जाएंगे ताकि कॉलेज बदलने पर उनकी पढ़ाई खराब न हो।
  • M.Phil को समाप्त कर दिया गया है: अब स्नातक और स्नातकोत्तर के बाद सीधे PhD की जा सकती है।

4. कौशल विकास और युवा रोजगार (Skill Development)

NEP 2020 केवल डिग्री देने पर नहीं, बल्कि ‘सीखने’ पर जोर देती है:

  • छठी कक्षा से इंटर्नशिप: युवाओं को स्थानीय व्यवसायों (जैसे- बढ़ईगीरी, बागवानी, कोडिंग) के साथ इंटर्नशिप करने का मौका मिलेगा।
  • Lok Vidya: भारत के पारंपरिक ज्ञान को मुख्यधारा की शिक्षा से जोड़ा जाएगा।
  • National Research Foundation (NRF): शोध (Research) की संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए इसकी स्थापना की गई है, ताकि युवा वैज्ञानिक सोच विकसित कर सकें।

5. तकनीकी और डिजिटल शिक्षा

डिजिटल इंडिया के युग में शिक्षा को तकनीक से जोड़ना अनिवार्य है:

  • NETF (National Educational Technology Forum): यह एक स्वायत्त निकाय होगा जो सीखने, मूल्यांकन और योजना बनाने में तकनीक के उपयोग पर विचार साझा करेगा।
  • दिव्यांग मित्र सॉफ्टवेयर: दिव्यांग युवाओं के लिए विशेष तकनीकी संसाधन।
  • E-Content: क्षेत्रीय भाषाओं में ई-कोर्स उपलब्ध कराए जाएंगे।

संस्थान

संस्थान/शब्दपूरा नाम (Full Form)उद्देश्य
PARAKHPerformance Assessment, Review, and Analysis of Knowledge for Holistic Developmentमानक निर्धारित करने वाला निकाय
HECIHigher Education Commission of Indiaपूरे उच्च शिक्षा (मेडिकल/कानूनी छोड़कर) के लिए एक एकल नियामक
NIPUN BharatNational Initiative for Proficiency in Reading with Understanding and Numeracyबुनियादी साक्षरता का लक्ष्य (2026-27 तक)
MERUMultidisciplinary Education and Research UniversitiesIIT/IIM के स्तर के बहुविषयक विश्वविद्यालय

निष्कर्ष (Conclusion)

नई शिक्षा नीति 2020 युवाओं को ‘रटंत विद्या’ से निकालकर ‘रचनात्मक सोच’ की ओर ले जाने का एक साहसिक प्रयास है। यदि इसे सही भावना के साथ लागू किया जाता है, तो यह भारत को “विश्व गुरु” बनाने और युवाओं को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने में मील का पत्थर साबित होगी। यह नीति “Job Seekers” (नौकरी खोजने वाले) के बजाय “Job Creators” (नौकरी देने वाले) पैदा करने का दृष्टिकोण रखती है।

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