Rajasthan ki Aadhunik Itihas ki Sabse Important Kahani
परिचय (Introduction)
हम जब राजस्थान की आधुनिक इतिहास की बात करते हैं, तो एक ऐसा समय दिखाई देता है जिसने पूरे समाज, राजनीति और आर्थिक ढांचे को बदलकर रख दिया।
18वीं सदी का अंत और 19वीं–20वीं सदी की शुरुआत राजस्थान के लिए बेहद चुनौतीपूर्ण लेकिन परिवर्तनकारी दौर रहा।
राजपूत रियासतें कमजोर होती जा रही थीं, मारकाट लगातार बढ़ रही थी, और अंग्रेज धीरे-धीरे रियासतों पर प्रभाव बढ़ा रहे थे।
लेकिन इसी समय राजस्थान में कई बड़े आंदोलन जन्म लेते हैं—जिन्होंने समाज में जागरूकता, शिक्षा, समानता और आजादी की भावना को मजबूत किया।
यह ब्लॉग आपको बहुत ही सरल, कहानी जैसी भाषा में राजस्थान के ब्रिटिश काल और महत्वपूर्ण आंदोलनों की पूरी यात्रा करवाएगा।
राजस्थान में अंग्रेजों का आगमन और राजनीतिक घटनाएं
राजस्थान में अंग्रेज क्यों आए ?
18वीं सदी में मुगल साम्राज्य कमजोर हो चुका था।
राजस्थान की रियासतें—जैसे जयपुर, जोधपुर, उदयपुर, कोटा, बूंदी, बीकानेर, जैसलमेर—एक दूसरे से लड़ रही थीं या मराठों के दबाव में थीं।
अंग्रेजों ने इसी कमजोरी का फायदा उठाकर रियासतों को अपने “सुरक्षा वचन” (Subsidiary Alliance) में शामिल करना शुरू किया।
Subsidiary Alliance और राजस्थान
पहली रियासत जिसने अंग्रेजों के साथ संधि की
👉 करौली (1817) — राजस्थान की पहली रियासत बनी जिसने वेल्ज़ली की नीति के तहत अंग्रेजों का संरक्षण स्वीकार किया।
सबसे महत्वपूर्ण संधि
👉 मेरठ की संधि (1818)
मेवाड़ (उदयपुर) ने अंग्रेजों से संधि की और इस संधि के बाद धीरे-धीरे पूरा राजस्थान अंग्रेजों के परोक्ष नियंत्रण में आ गया।
1818 की संधियों को राजस्थान की आधुनिक राजनीतिक व्यवस्था की शुरुआत माना जाता है।
Political Agents और Residents का सिस्टम
अंग्रेजों ने हर क्षेत्र में अपने प्रतिनिधि बैठाए:
| क्षेत्र | Agency | वर्ष |
|---|---|---|
| मेवाड़ | उदयपुर एजेंसी | 1818 |
| हाड़ौती | कोटा-बूंदी एजेंसी | 1820 |
| पश्चिम राजस्थान | राजपूताना एजेंसी | 1832 |
| बीकानेर, जैसलमेर | थार एजेंसी | 1867 |
इन एजेंटों के हाथों में रियासतों का असली प्रशासनिक नियंत्रण रहता था।
सामाजिक सुधार और जागृति आंदोलन (19वीं–20वीं सदी)
यह समय राजस्थान के समाज को भीतर से बदलने वाले लोगों का समय था।
नीचे सभी महत्वपूर्ण आंदोलन और सुधारकों को आसान भाषा में समझाया गया है।
1. शिक्षा और सामाजिक जागरण—स्वामी विवेकानंद और दयानंद का प्रभाव
स्वामी दयानंद सरस्वती (1824–1883)
राजस्थान में उनके विचारों का गहरा प्रभाव पड़ा—विशेषकर अजमेर, जयपुर, जोधपुर में।
उनके कार्य:
- वेदिक शिक्षा पर जोर
- महिला शिक्षा का समर्थन
- बाल विवाह का विरोध
- शराबबंदी और सामाजिक शुद्धि आंदोलन
अजमेर का दयानंद सरस्वती कॉलेज (1899) उनके विचारों का बड़ा केंद्र बना।
2. आर्य समाज आंदोलन का प्रभाव
आर्य समाज ने राजस्थान में विशेष रूप से दो चीजें बदलीं:
1️⃣ शिक्षा — लड़कियों के लिए स्कूल खोले गए
2️⃣ छुआछूत, दहेज, मूर्तिपूजा जैसी कुरीतियों के खिलाफ अभियान
राजस्थान के कई नेता, जैसे हरिभाऊ उपाध्याय, मंजू लाल, और आचार्य नरेन्द्र देव, इस आंदोलन से प्रभावित हुए।
3. संतों और लोकनेताओं का योगदान
गोकुलभाई भट्ट
“राजस्थान का गांधी” कहा गया।
उन्होंने शिक्षा, ग्रामीण विकास और महिलाओं के अधिकारों के लिए काम किया।
मीरा आंदोलन
निम्न जाति के लोगों में सामाजिक बराबरी का संदेश फैलाया गया।
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राजस्थान में प्रमुख किसान एवं जन आंदोलन
1. भील आंदोलन (Bhil Movement)
नेता: गोविंद गुरु
स्थान: बांसवाड़ा–डूंगरपुर
मुख्य उद्देश्य:
- वन अधिकार
- अन्यायपूर्ण करों का विरोध
- शराबबंदी
- सामाजिक सुधार
सबसे बड़ी घटना —मानगढ़ हत्याकांड (1913)
- 17 नवंबर 1913 को ब्रिटिश सेना ने हजारों भीलों पर गोलियां चलाईं
- लगभग 1500 से अधिक भील शहीद हुए
- इसे “राजस्थान का जलियांवाला बाग” भी कहा जाता है
यह राजस्थान के इतिहास का सबसे दर्दनाक लेकिन प्रेरक अध्याय है।
2. बेगार प्रथा विरोध आंदोलन
क्या थी बेगार प्रथा?
राजपूत रियासतें किसानों और गरीबों से बिना मजदूरी के जबरन काम करवाती थीं—इसे बेगार कहा जाता था।
बेगार समाप्ति वर्ष:
👉 1946 (अंग्रेजों के दबाव और स्थानीय आंदोलनों के कारण कई रियासतों में खत्म हुई)
इस आंदोलन को आगे बढ़ाने वाले प्रमुख चेहरे:
- गोविंद गुरु
- बालू जी भाभूत
- जसवंत सिंह
- झूंझार गांव के किसान संगठन
3. बिजोलिया आंदोलन (1916–1941)
राजस्थान का सबसे प्रसिद्ध किसान आंदोलन।
नेता:
- साधु सीताराम दास
- विजय सिंह पथिक
- मनिक्यलाल वर्मा
क्यों शुरू हुआ?
किसानों पर 86 से ज्यादा कर लगाए जाते थे, जैसे:
- लगान
- बेगार
- तालाब कर
- हारी कर
- चराई कर
- विवाह कर
मुख्य घटनाएं:
| वर्ष | घटना |
|---|---|
| 1916 | आंदोलन की शुरुआत |
| 1920 | पथिकजी के नेतृत्व में आंदोलन राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आया |
| 1923 | “नो-टैक्स कैंपेन” शुरू |
| 1941 | कई कर समाप्त हुए |
बिजोलिया आंदोलन को राजस्थान का “किसान स्वराज” आंदोलन भी कहा जाता है।
4. मेवाड़ किसान आंदोलन
नेता: मनिक्यलाल वर्मा
उद्देश्य:
- जागीर व्यवस्था खत्म करना
- किसानों पर अत्याचार रोकना
- शिक्षा और समान अधिकार
यह आंदोलन बाद में मैवाड़ के सामाजिक सुधारों की रीढ़ बना।
महिला जागरण और सुधार
राजस्थान में ब्रिटिश काल में महिलाओं की स्थिति कमजोर थी—सती प्रथा, पर्दा प्रथा, बाल विवाह जैसे मुद्दे बहुत गहरे थे।
महिला शिक्षा की शुरुआत:
- अजमेर में सिंधिया कन्या स्कूल (1867)
- जयपुर में महिला विद्यालय (1867)
महिला आंदोलनों की प्रमुख नेता:
- विद्या देवी भट्ट
- कृष्ण कुमारी (बीकानेर)
- राजमाता गायत्री देवी — जिन्होंने शिक्षा और खेल को बढ़ावा दिया
इन कार्यों से राजस्थान में समाज तेजी से बदला।
राजस्थान में राष्ट्रीय आंदोलन का प्रभाव
अंग्रेजों के खिलाफ कई बड़े राष्ट्रीय नेता राजस्थान आए।
1. महात्मा गांधी का राजस्थान से जुड़ाव
गांधीजी ने 1917, 1919 और 1921 में राजस्थान के कई क्षेत्रों में कार्यक्रम किए।
उनके प्रभाव से:
- चरखा आंदोलन तेज हुआ
- शराबबंदी अभियान मजबूत हुआ
- राजपूताना में कांग्रेस कमेटियों का गठन हुआ
2. राजस्थान में प्रजामंडल आंदोलन
क्या था प्रजामंडल आंदोलन?
राजस्थान की हर रियासत में लोकतांत्रिक अधिकार, समान कानून और भ्रष्टाचार खत्म करने के लिए जनता ने संगठन बनाए।
प्रमुख प्रजामंडल:
| रियासत | संगठन | वर्ष |
|---|---|---|
| जयपुर | जयपुर प्रजामंडल | 1931 |
| जोधपुर | मारवाड़ हितकारिणी सभा | 1924 |
| मेवाड़ | मेवाड़ प्रजामंडल | 1938 |
| बीकानेर | बीकानेर प्रजामंडल | 1944 |
| कोटा | कोटा प्रजामंडल | 1938 |
प्रजामंडल आंदोलन की वजह से लोकतांत्रिक चेतना राजस्थान में बहुत मजबूत हुई।
राजस्थान में अंग्रेजी शासन का प्रशासनिक प्रभाव
अंग्रेजों ने क्या-क्या बदलाव किए?
- Revenue system का सुधार (कर और लगान व्यवस्था)
- Railway network (1880–1910) का विस्तार
- Modern courts & police system
- Education policies (Mission schools)
- Forest laws (जंगलों का सरकारी नियंत्रण)
- Health services की शुरुआत (Civil hospitals)
रेलवे का प्रभाव:
- 1881: अजमेर–अहमदाबाद लाइन
- 1889: जयपुर–अलवर लाइन
- 1908: जोधपुर–बीकानेर लाइन
रेलवे ने व्यापार और यात्राओं को बदल डाला।
राजस्थान का एकीकरण (1948–1956)
राजस्थान का आधुनिक राज्य बनने की प्रक्रिया अंग्रेजों के जाने के बाद पूरी हुई।
एकीकरण के चरण:
- 17 मार्च 1948 — मत्स्य संघ
- 18 अप्रैल 1948 — राजस्थान संघ
- 1949 — बड़ा राजस्थान
- 1950 — संयुक्त राजस्थान
- 1956 — आधुनिक राजस्थान का गठन
पहले मुख्यमंत्री:
👉 हीरा लाल शास्त्री (1949)
निष्कर्ष (Conclusion)
राजस्थान का यह आधुनिक काल संघर्ष, बदलाव और जागरण का काल था।
किसानों ने आवाज उठाई, समाज में बराबरी की लहर उठी, महिलाओं के लिए शिक्षा के दरवाजे खुले, और अंत में लोकतंत्र की नींव रखी गई।
आज का राजस्थान उसी इतिहास की देन है—जहां साहस, त्याग और सामाजिक सुधार के उदाहरण हर ओर मिलते हैं।
FAQs
Q1. राजस्थान में अंग्रेजों के आने का मुख्य कारण क्या था?
राजस्थान की रियासतें कमजोर थीं और मराठों का दबाव बढ़ रहा था। इस स्थिति में अंग्रेजों ने सुरक्षा और सहायता के नाम पर रियासतों पर नियंत्रण बनाना शुरू किया।
Q2. राजस्थान में पहला बड़ा किसान आंदोलन कौन सा था?
सबसे प्रसिद्ध किसान आंदोलन बिजोलिया आंदोलन (1916–1941) था, जिसमें किसानों ने अत्यधिक करों और बेगार प्रथा के खिलाफ संघर्ष किया।
Q3. मंगरह हत्याकांड क्या था?
1913 में बांसवाड़ा-डूंगरपुर क्षेत्र में भील आदिवासियों के शांतिपूर्ण सम्मेलन पर अंग्रेजी सेना ने गोली चलाई, जिसमें लगभग 1500 भील शहीद हुए। इसे राजस्थान का जलियांवाला बाग कहा जाता है।
Q4. प्रजामंडल आंदोलन का मुख्य लक्ष्य क्या था?
रियासतों में लोकतंत्र, समान कानून और जनता के अधिकार स्थापित करना। हर रियासत में अलग-अलग प्रजामंडल बने जैसे जयपुर प्रजामंडल, मेवाड़ प्रजामंडल आदि।
Q5. राजस्थान का आधुनिक एकीकरण कब पूरा हुआ?
राजस्थान का एकीकरण कई चरणों में हुआ और 1956 में वर्तमान राजस्थान राज्य का अंतिम स्वरूप तैयार हुआ।

