भारतीय इतिहास की शुरुआत सिंधु घाटी सभ्यता से ही मानी जाती है। यह न केवल भारत की, बल्कि विश्व की प्राचीनतम और सबसे विकसित सभ्यताओं में से एक है। इसे ‘कांस्ययुगीन सभ्यता’ कहा जाता है क्योंकि इस काल में मनुष्यों ने तांबे और टिन को मिलाकर ‘कांसा’ (Bronze) बनाना सीख लिया था। साथ ही, अपनी बेहतरीन नगर नियोजन प्रणाली के कारण इसे ‘प्रथम नगरीय क्रांति’ भी कहा जाता है।
1. भूमिका और नामकरण (Introduction and Nomenclature)
सिंधु घाटी सभ्यता का विस्तार केवल सिंधु नदी तक सीमित नहीं था, बल्कि यह भारत के एक बड़े भू-भाग पर फैली हुई थी।
- हड़प्पा सभ्यता (Harappan Civilization): चूंकि इस सभ्यता का सबसे पहला खोजा गया स्थल ‘हड़प्पा’ था, इसलिए पुरातात्विक परंपरा के अनुसार इसे हड़प्पा सभ्यता कहा जाता है।
- सिंधु घाटी सभ्यता (Indus Valley Civilization): प्रारंभ में अधिकांश स्थल सिंधु और उसकी सहायक नदियों के किनारे मिले, इसलिए इसे यह नाम दिया गया।
- सिंधु-सरस्वती सभ्यता: वर्तमान शोधों के अनुसार, इस सभ्यता के सर्वाधिक स्थल (लगभग 80%) विलुप्त हो चुकी सरस्वती नदी (घग्घर-हाकरा) के तट पर पाए गए हैं।
2. खोज और कालक्रम (Discovery and Chronology)
इस सभ्यता की खोज की कहानी अत्यंत रोचक है।
- प्रथम जानकारी: 1826 में चार्ल्स मैसन ने सबसे पहले हड़प्पा के टीलों की ओर ध्यान आकर्षित किया।
- वैज्ञानिक खोज: 1921 में रायबहादुर दयाराम साहनी ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के महानिदेशक सर जॉन मार्शल के नेतृत्व में हड़प्पा की खुदाई की।
- मोहनजोदड़ो: 1922 में राखालदास बनर्जी ने मोहनजोदड़ो की खोज की।
- समय सीमा (Time Period): रेडियो कार्बन डेटिंग ($C^{14}$) के अनुसार, इस सभ्यता का सर्वमान्य काल 2500 ई.पू. से 1750 ई.पू. माना जाता है। इसे तीन चरणों में बाँटा जा सकता है:
- प्राक-हड़प्पा (Early Harappan)
- परिपक्व हड़प्पा (Mature Harappan)
- उत्तर-हड़प्पा (Late Harappan)
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3. भौगोलिक विस्तार (Geographical Extent)
यह सभ्यता उस समय की मिस्र (Egypt) और मेसोपोटामिया की सभ्यताओं से कहीं अधिक विशाल थी। इसका कुल क्षेत्रफल लगभग 12,99,600 वर्ग किलोमीटर था।
- उत्तरी बिंदु: मांडा (जम्मू-कश्मीर), चिनाब नदी के किनारे।
- दक्षिणी बिंदु: दैमाबाद (महाराष्ट्र), प्रवरा नदी के किनारे।
- पूर्वी बिंदु: आलमगीरपुर (उत्तर प्रदेश), हिंडन नदी के किनारे।
- पश्चिमी बिंदु: सुतकागेंडोर (बलूचिस्तान, पाकिस्तान), दाश्क नदी के किनारे।
4. नगर नियोजन: एक अद्वितीय विशेषता (Town Planning: A Unique Feature)
सिंधु सभ्यता की सबसे बड़ी विशेषता उसका नगरीकरण (Urbanization) था। यह आज के आधुनिक शहरों की तरह व्यवस्थित थी।
अ. ग्रिड प्रणाली (Grid System)
शहरों की सड़कें एक-दूसरे को समकोण (90 डिग्री) पर काटती थीं, जिससे पूरा शहर शतरंज की बिसात (Grid) की तरह दिखाई देता था। सड़कों के किनारे जल निकासी के लिए नालियों की व्यवस्था थी।
ब. जल निकासी प्रणाली (Drainage System)
यह सभ्यता अपनी स्वच्छता के लिए जानी जाती थी। हर घर से छोटी नालियाँ निकलकर मुख्य सड़क की बड़ी नाली में मिलती थीं। नालियाँ ईंटों और पत्थरों से ढकी होती थीं और बीच-बीच में ‘मेनहोल’ (Manholes) भी बनाए गए थे ताकि सफाई की जा सके।
स. दुर्ग और निचला शहर (Citadel and Lower Town)
अधिकांश शहर दो भागों में विभाजित थे:
- पश्चिमी टीला (दुर्ग/Citadel): यहाँ शासक वर्ग या पुरोहित रहते थे। यह भाग ऊँचाई पर स्थित और किलेबंद था।
- पूर्वी टीला (निचला शहर): यहाँ सामान्य नागरिक, व्यापारी और शिल्पकार रहते थे।
द. ईंटों का प्रयोग (Use of Bricks)
भवन निर्माण में पकी हुई ईंटों का उपयोग किया गया था। ईंटों का अनुपात 4:2:1 (लंबाई:चौड़ाई:ऊंचाई) होता था, जो उनकी उन्नत गणितीय समझ को दर्शाता है।
5. प्रमुख स्थल और उनकी विशेषताएं (Major Sites and Their Features)
1. हड़प्पा (Harappa) – पाकिस्तान
- यह रावी नदी के किनारे स्थित है।
- यहाँ से 12 अन्नागार (Granaries), तांबे का पैमाना और ‘R-37’ कब्रिस्तान मिला है।
2. मोहनजोदड़ो (Mohenjo-daro) – पाकिस्तान
- इसका अर्थ है ‘मृतकों का टीला’। यह सिंधु नदी के किनारे स्थित है।
- विशाल स्नानागार (The Great Bath): यह धार्मिक अनुष्ठान के लिए इस्तेमाल होने वाला सबसे महत्वपूर्ण सार्वजनिक स्थल था।
- नर्तकी की मूर्ति: यहाँ से कांसे की बनी एक नर्तकी की प्रसिद्ध मूर्ति मिली है।
3. लोथल (Lothal) – गुजरात, भारत
- यह एक गोदीवाड़ा (Dockyard) या बंदरगाह था, जो भोगवा नदी के किनारे स्थित था।
- यहाँ से समुद्री व्यापार के प्रमाण मिले हैं। यहाँ ‘चावल’ के अवशेष और ‘अग्नि कुंड’ भी पाए गए हैं।
4. कालीबंगा (Kalibangan) – राजस्थान, भारत
- इसका अर्थ है ‘काले रंग की चूड़ियाँ’। यह घग्घर नदी के किनारे स्थित है।
- यहाँ से जुते हुए खेत के साक्ष्य मिले हैं, जो विश्व में सबसे पुराने हैं। यहाँ भूकंप के प्राचीनतम प्रमाण भी मिले हैं।
5. धोलावीरा (Dholavira) – गुजरात
- यह शहर तीन भागों में विभाजित था।
- यहाँ जल प्रबंधन (Water Management) की अद्भुत व्यवस्था और एक विशाल जलाशय (Reservoir) मिला है।
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6. सामाजिक और धार्मिक जीवन (Social and Religious Life)
सामाजिक संरचना (Social Structure)
- समाज मातृसत्तात्मक (Matriarchal) होने के अनुमान हैं क्योंकि खुदाई में बड़ी संख्या में मातृदेवी की मूर्तियाँ मिली हैं।
- समाज विभिन्न वर्गों में बँटा था: विद्वान, योद्धा, व्यापारी और श्रमिक।
धार्मिक विश्वास (Religious Beliefs)
- प्रकृति पूजा: वे पीपल के वृक्ष, जल और सूर्य की पूजा करते थे।
- पशुपति शिव: एक मुहर पर तीन मुख वाले देवता मिले हैं, जिन्हें मार्शल ने ‘आद्य शिव’ (Proto-Shiva) कहा है।
- मातृदेवी: उर्वरता की देवी के रूप में धरती माँ की पूजा की जाती थी।
- अंतिम संस्कार: वे शवों को जलाने, दफनाने और आंशिक समाधिकरण (शव को जंगल में छोड़ना) जैसी प्रथाएं अपनाते थे।
7. आर्थिक जीवन (Economic Life)
कृषि (Agriculture)
सिंधु निवासी विश्व में सर्वप्रथम कपास (Cotton) पैदा करने वाले लोग थे। यूनानियों ने इसीलिए कपास को ‘सिन्डन’ (Sindon) कहा। वे गेहूँ, जौ, राय, मटर और तिल भी उगाते थे।
व्यापार (Trade)
- उनका व्यापार केवल आंतरिक नहीं, बल्कि विदेशी भी था (मेसोपोटामिया, ईरान, अफगानिस्तान)।
- मेसोपोटामिया के अभिलेखों में सिंधु क्षेत्र को ‘मेलुहा’ (Meluha) कहा गया है।
- व्यापार विनिमय प्रणाली (Barter System) पर आधारित था क्योंकि सिक्कों का कोई प्रमाण नहीं मिला है।
8. कला, शिल्प और लिपि (Art, Craft and Script)
लिपि (Script)
- हड़प्पा लिपि ‘भाव-चित्रात्मक’ (Boustrophedon) थी।
- इसे आज तक पढ़ा नहीं जा सका है। यह दाईं से बाईं ओर और फिर अगली पंक्ति में बाईं से दाईं ओर लिखी जाती थी।
मुहरें (Seals)
- ज्यादातर मुहरें सेलखड़ी (Steatite) की बनी होती थीं।
- इन पर एक श्रृंगी बैल (Unicorn), हाथी और बाघ जैसे जानवरों के चित्र होते थे।
9. सभ्यता के पतन के कारण (Causes for the Decline)
इतनी महान सभ्यता का अंत कैसे हुआ, यह आज भी शोध का विषय है। विद्वानों के अलग-अलग मत हैं:
| विद्वान (Scholar) | पतन का कारण (Reason for Decline) |
| रॉबर्ट रिक्स और सर जॉन मार्शल | बाढ़ (Flood) |
| औरेल स्टीन | जलवायु परिवर्तन (Climate Change) |
| व्हीलर और गॉर्डन चाइल्ड | आर्यों का आक्रमण (Aryan Invasion) |
| के.यू.आर. कैनेडी | प्राकृतिक आपदा/महामारी (Epidemic) |
10. निष्कर्ष (Conclusion)
सिंधु घाटी सभ्यता ने भारत को एक सुसंस्कृत नींव प्रदान की। उनकी नगरीय योजना, स्वच्छता के प्रति जागरूकता और शांतिप्रिय जीवन आज के आधुनिक युग के लिए भी प्रेरणास्रोत है। हालांकि यह सभ्यता लगभग 1750 ई.पू. के आसपास समाप्त हो गई, लेकिन इसकी कई परंपराएं (जैसे योग, शक्ति पूजा, स्वस्तिक चिन्ह) आज भी भारतीय संस्कृति का हिस्सा हैं।




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