राजस्थान के उदयपुर जिले में आयड़ (बेड़च) नदी के किनारे फली-फूली आहड़ सभ्यता, दक्षिण-पश्चिमी राजस्थान का सबसे महत्वपूर्ण पुरातात्विक केंद्र है। यह सभ्यता अपनी अनूठी ग्रामीण जीवन शैली और तांबे के काम के लिए विश्व प्रसिद्ध है।
अवस्थिति और परिचय (Location and Overview)
स्थान (Location): यह वर्तमान उदयपुर शहर के पास स्थित है।
नदी (River): यह सभ्यता आयड़ नदी (जिसे आगे चलकर बेड़च नदी कहा जाता है) के तट पर विकसित हुई।
अन्य नाम (Nicknames):
- ताम्रवती नगरी: यहाँ तांबे के औजार बनाने के बहुत सारे केंद्र मिले हैं।
- आघाटपुर/आघाटदुर्ग: 10वीं और 11वीं शताब्दी में इसे इस नाम से जाना जाता था।
- धूलकोट: स्थानीय लोग इसे ‘धूलकोट’ (रेत का टीला) कहते हैं।
खोज और उत्खनन (Discovery and Excavation)
आहड़ की खुदाई कई चरणों में हुई, जिससे इसके अलग-अलग स्तरों का पता चला:
- प्रथम खोज (1953): इसकी पहली खोज अक्षय कीर्ति व्यास (A.K. Vyas) ने की थी।
- द्वितीय उत्खनन (1954-56): रत्नचंद्र अग्रवाल (R.C. Agrawal) के नेतृत्व में यहाँ खुदाई की गई।
- विस्तृत उत्खनन (1961-62): पूना विश्वविद्यालय के प्रोफेसर हसमुख धीरजलाल सांकलिया (H.D. Sankalia) के निर्देशन में यहाँ सबसे व्यापक खुदाई हुई।
Raed More गणेश्वर सभ्यता
कालक्रम और संस्कृति (Chronology and Culture)
- समय सीमा (Timeline): कार्बन डेटिंग के अनुसार, यह सभ्यता 1900 ई.पू. से 1200 ई.पू. तक अस्तित्व में थी।
- बनास संस्कृति (Banas Culture): चूंकि आहड़ के अधिकांश केंद्र बनास नदी घाटी में स्थित हैं, इसलिए इतिहासकार ए.एन. घोष ने इसे ‘बनास संस्कृति’ नाम दिया।
प्रमुख विशेषताएं और साक्ष्य (Key Features and Evidences)
आहड़ की खुदाई से प्राप्त अवशेष इसे एक विकसित ग्रामीण सभ्यता सिद्ध करते हैं:
अ. तांबा उद्योग (Copper Industry)
यहाँ तांबा गलाने की भट्टियाँ (Furnaces) मिली हैं। इससे पता चलता है कि आहड़ के लोग तांबा साफ करने और उससे कुल्हाड़ियाँ, चूड़ियाँ और चादरें बनाने में निपुण थे।
ब. मृदभांड: लाल-काले बर्तन (Pottery: Red and Black Ware)
आहड़ अपने विशेष प्रकार के बर्तनों के लिए जानी जाती है:
- इन्हें ‘उल्टी तपाई’ (Reverse Firing) पद्धति से पकाया जाता था।
- ये बर्तन अंदर से काले और बाहर से लाल होते थे।
- गोरे और कोठ: अनाज रखने के लिए मिट्टी के बड़े घड़ों का उपयोग किया जाता था, जिन्हें स्थानीय भाषा में ‘गोरे’ या ‘कोट’ कहा जाता था।
स. मुद्राएँ और मुहरें (Coins and Seals)
यहाँ से 6 तांबे की मुद्राएँ और 3 मुहरें प्राप्त हुई हैं। एक मुद्रा पर यूनानी देवता अपोलो का चित्र बना है, जिसके हाथ में तीर और पीछे तरकश है। यह यूनान के साथ व्यापारिक संबंधों की ओर इशारा करता है।
वास्तुकला और समाज (Architecture and Society)
- मकान निर्माण: यहाँ के मकान पत्थर और मिट्टी की ईंटों से बने थे। छतों पर बांस और घास-फूस का उपयोग किया जाता था।
- संयुक्त परिवार: एक घर में 4 से 6 चूल्हे मिले हैं, जो संयुक्त परिवार प्रथा (Joint Family System) का संकेत देते हैं। एक चूल्हे पर तो इंसानी हथेली के छाप भी मिले हैं।
- जल निकासी: गंदे पानी की निकासी के लिए ‘चक्रकूप’ (Ring Wells) पद्धति का प्रयोग किया जाता था।
आर्थिक और धार्मिक जीवन (Economic and Religious Life)
- कृषि: यहाँ के लोग मुख्य रूप से चावल से परिचित थे। इसके अलावा वे ज्वार और गेहूं भी उगाते थे।
- पशुपालन: गाय, बैल, भेड़ और बकरियां पालना उनका मुख्य पेशा था। यहाँ से मिट्टी की बनी बनासियन बुल (Banassian Bull) की मूर्ति मिली है।
- धार्मिक विश्वास: यहाँ के लोग शवों को कपड़ों और गहनों के साथ दफनाते थे, जो उनके पुनर्जन्म में विश्वास को दर्शाता है। उनका सिर उत्तर दिशा की ओर रखा जाता था।
Raed More कालीबंगा सभ्यता
महत्वपूर्ण तथ्य: एक नज़र में (Quick Facts Table)
| पहलू (Aspect) | विवरण (Description) |
| मुख्य स्थान | उदयपुर (आयड़ नदी) |
| खोजकर्ता | अक्षय कीर्ति व्यास (1953) |
| प्रमुख उद्योग | तांबा गलाना और उपकरण बनाना |
| विशेष पात्र | गोरे और कोट (अनाज भंडारण) |
| विदेशी संपर्क | यूनानी मुद्रा (अपोलो का चित्र) |
(FAQs)
Q1. आहड़ सभ्यता को ‘धूलकोट’ क्यों कहा जाता है?
उत्तर: क्योंकि यह सभ्यता एक विशाल रेत के टीले के नीचे दबी हुई मिली थी, जिसे स्थानीय लोग धूलकोट कहते हैं।
Q2. ‘बनासियन बुल’ क्या है?
उत्तर: आहड़ से प्राप्त मिट्टी की बनी बैल की मूर्ति को पुरातत्वविदों ने ‘बनासियन बुल’ नाम दिया है।
Q3. आहड़ के लोग किस धातु से अपरिचित थे?
उत्तर: सिंधु घाटी की तरह आहड़ के लोग भी लोहे (Iron) के उपयोग से प्रारंभ में अपरिचित थे, हालांकि बाद के स्तरों में लोहे के प्रमाण मिलते हैं।




Pingback: गणेश्वर सभ्यता | Ganeshwar Civilization - rajspire.com
Pingback: बैराठ सभ्यता: मौर्य और बौद्ध कालीन इतिहास | Bairat Civilization And Major Sites