राजस्थान विधानसभा: इतिहास, गठन, सीटों का विकास, भवन, 13 नए द्वार और NeVA | Rajasthan Legislative Assembly Complete Guide

Table of Contents

राजस्थान विधानसभा क्या है? | What is Rajasthan Legislative Assembly?

राजस्थान विधानसभा राज्य की एकसदनीय विधायिका (Unicameral Legislature) है। यह राज्य में कानून बनाने, बजट पारित करने, सरकारी नीतियों पर चर्चा करने और कार्यपालिका की जवाबदेही सुनिश्चित करने का प्रमुख संवैधानिक मंच है।

भारतीय संविधान के अनुच्छेद 168 के अनुसार किसी राज्य में एक सदन या दो सदनों वाली विधायिका हो सकती है। राजस्थान में केवल विधानसभा है और यहां विधान परिषद नहीं है। वर्तमान में राजस्थान विधानसभा में कुल 200 सदस्य हैं।

राजस्थान विधानसभा से जुड़े प्रश्न राजस्थान की प्रतियोगी परीक्षाओं जैसे RPSC, REET, राजस्थान पुलिस, पटवारी, ग्राम विकास अधिकारी और अन्य सरकारी परीक्षाओं में अक्सर पूछे जाते हैं।

राजस्थान विधानसभा का इतिहास और गठन | History and Formation

राजस्थान विधानसभा का इतिहास राजस्थान के एकीकरण और लोकतांत्रिक शासन के विकास से जुड़ा हुआ है। वर्तमान राजस्थान का निर्माण विभिन्न रियासतों और क्षेत्रों के क्रमिक एकीकरण से हुआ।

स्वतंत्र भारत में राजस्थान की पहली विधानसभा का चुनाव 1952 में वयस्क मताधिकार के आधार पर हुआ। पहली विधानसभा का गठन 23 फरवरी 1952 को हुआ और इसकी पहली बैठक 29 मार्च 1952 को जयपुर के सवाई मानसिंह टाउन हॉल में आयोजित की गई।

उस समय राजस्थान विधानसभा में कुल 160 सदस्य थे। सवाई मानसिंह टाउन हॉल लंबे समय तक विधानसभा के कामकाज का प्रमुख केंद्र रहा। वर्तमान विधानसभा भवन बनने तक इसी भवन का उपयोग विधानसभा की बैठकों के लिए किया जाता था।

राजस्थान विधानसभा गठन के महत्वपूर्ण तथ्य

  • पहली विधानसभा का गठन: 23 फरवरी 1952
  • पहली बैठक: 29 मार्च 1952
  • पहला विधानसभा भवन: सवाई मानसिंह टाउन हॉल, जयपुर
  • प्रथम विधानसभा की सदस्य संख्या: 160
  • वर्तमान विधानसभा की सदस्य संख्या: 200

राजस्थान की पहली निर्वाचित सरकार | First Elected Government of Rajasthan

1952 का विधानसभा चुनाव राजस्थान में लोकतांत्रिक शासन की स्थापना की दिशा में महत्वपूर्ण कदम था। पहली निर्वाचित विधानसभा के बाद टीकाराम पालीवाल राजस्थान के प्रथम निर्वाचित मुख्यमंत्री बने।

टीकाराम पालीवाल ने 3 मार्च 1952 को मुख्यमंत्री पद संभाला। इसके बाद उसी वर्ष जय नारायण व्यास मुख्यमंत्री बने। पहली विधानसभा के कार्यकाल में टीकाराम पालीवाल, जय नारायण व्यास और मोहनलाल सुखाड़िया ने मुख्यमंत्री के रूप में कार्य किया।

यहां यह समझना जरूरी है कि राजस्थान में 1950 के दशक की शुरुआती सरकारों और 1952 में गठित पहली निर्वाचित विधानसभा सरकार को एक ही संदर्भ में नहीं देखा जाना चाहिए।


राजस्थान विधानसभा की सीटों का विकास | Seat Strength of Rajasthan Assembly

राजस्थान विधानसभा में शुरुआत से 200 सीटें नहीं थीं। राज्य पुनर्गठन और परिसीमन के कारण समय-समय पर विधानसभा की सीटों की संख्या में बदलाव हुआ।

विधानसभा/वर्षकुल सीटें
1952160
1956 के पुनर्गठन के बाद190
1957176
1967184
1977 से वर्तमान200

सीटों का महत्वपूर्ण क्रम

160 → 190 → 176 → 184 → 200

यह क्रम राजस्थान विधानसभा के इतिहास और प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।

नवंबर 1956 में अजमेर विधानसभा के राजस्थान में विलय के बाद विधानसभा की सदस्य संख्या बढ़कर 190 हो गई। इसके बाद 1957 में सीटों की संख्या 176, 1967 में 184 और 1977 से 200 हो गई।


राजस्थान विधानसभा में आरक्षित सीटें | Reserved Seats

वर्तमान 200 सदस्यीय राजस्थान विधानसभा में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लिए सीटें आरक्षित हैं।

  • अनुसूचित जाति (SC) के लिए आरक्षित सीटें: 34
  • अनुसूचित जनजाति (ST) के लिए आरक्षित सीटें: 25
  • कुल आरक्षित सीटें: 59
  • अन्य सीटें: 141

आरक्षित सीटों का निर्धारण परिसीमन और जनसंख्या के संवैधानिक प्रावधानों के आधार पर किया जाता है।


राजस्थान विधानसभा भवन, जयपुर | Rajasthan Assembly Building

वर्तमान राजस्थान विधानसभा भवन जयपुर के ज्योति नगर में स्थित है। यह भवन राजस्थान की पारंपरिक स्थापत्य शैली और आधुनिक सुविधाओं का सुंदर संयोजन प्रस्तुत करता है।

  • राजस्थान विधानसभा भवन से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्य
  • निर्माण कार्य शुरू: नवंबर 1994
  • निर्माण कार्य पूरा: मार्च 2001
  • परिसर का क्षेत्रफल: लगभग 16.96 एकड़
  • भवन की ऊंचाई: लगभग 145 फीट
  • मुख्य गुंबद का व्यास: लगभग 104 फीट
  • भवन की मंजिलें: 8
  • कुल फ्लोर एरिया: लगभग 6.08 लाख वर्ग फुट

विधानसभा भवन के निर्माण में राजस्थान की पारंपरिक वास्तुकला का विशेष ध्यान रखा गया है। भवन में झरोखे, छतरियां, बारादरियां, मेहराब और अन्य राजस्थानी स्थापत्य तत्व दिखाई देते हैं।

इसके निर्माण में जोधपुर और बंसी पहाड़पुर के पत्थरों का उपयोग किया गया है। भवन के आंतरिक प्रवेश क्षेत्रों में जयपुर, शेखावाटी, मारवाड़ और मेवाड़ की पारंपरिक कला को प्रदर्शित किया गया है।

विधानसभा भवन की विशेषताएं

मुख्य विधानसभा कक्ष में 260 सदस्यों के बैठने की क्षमता है। पांचवीं मंजिल पर भी इसी क्षमता वाला एक अन्य सभागार बनाया गया है। भविष्य में यदि राजस्थान में विधान परिषद का गठन होता है, तो इस सभागार का उपयोग किया जा सकता है।

हालांकि वर्तमान में राजस्थान में विधान परिषद नहीं है और राज्य की विधायिका एकसदनीय है।


राजस्थान विधानसभा के प्रथम अध्यक्ष | First Speaker

राजस्थान विधानसभा के प्रथम अध्यक्ष नरोत्तम लाल जोशी थे। उन्होंने पहली विधानसभा के अध्यक्ष के रूप में कार्य किया।

उपलब्ध ऐतिहासिक रिकॉर्ड के अनुसार उनका कार्यकाल 31 मार्च 1952 से 25 अप्रैल 1957 तक रहा।

राजस्थान विधानसभा के प्रमुख अध्यक्ष

रामनिवास मिर्धा राजस्थान विधानसभा के सबसे लंबे समय तक अध्यक्ष रहने वाले प्रमुख नेताओं में शामिल हैं। उन्होंने 1957 से 1967 तक लगभग 10 वर्षों तक विधानसभा अध्यक्ष के रूप में कार्य किया।


राजस्थान विधानसभा की प्रथम महिला विधायक | First Woman MLA

राजस्थान की प्रथम महिला विधायक के रूप में यशोदा देवी का नाम महत्वपूर्ण है।

उन्होंने 1953 के उपचुनाव में बांसवाड़ा विधानसभा क्षेत्र से जीत दर्ज की थी। वे प्रजा सोशलिस्ट पार्टी से चुनाव मैदान में उतरी थीं और राजस्थान विधानसभा की पहली महिला विधायक बनीं।

यशोदा देवी की जीत राजस्थान की राजनीति में महिलाओं की शुरुआती भागीदारी का महत्वपूर्ण उदाहरण है।


राजस्थान की प्रथम महिला मंत्री | First Woman Minister

कमला बेनीवाल को राजस्थान की प्रथम महिला मंत्री के रूप में व्यापक रूप से जाना जाता है। उन्होंने राजस्थान की राजनीति में लंबे समय तक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

बाद में वे राजस्थान की उपमुख्यमंत्री भी बनीं। महिला राजनीतिक नेतृत्व के इतिहास में कमला बेनीवाल का योगदान उल्लेखनीय है।


राजस्थान विधानसभा की प्रथम महिला अध्यक्ष | First Woman Speaker

सुमित्रा सिंह राजस्थान विधानसभा की पहली महिला अध्यक्ष बनीं। उन्होंने 2004 से 2009 के बीच विधानसभा अध्यक्ष के रूप में कार्य किया।

वे राजस्थान विधानसभा की नौ बार विधायक भी रहीं। राजस्थान की संसदीय राजनीति में उनका योगदान महत्वपूर्ण माना जाता है।


पूनम चंद विश्नोई का संसदीय रिकॉर्ड | Parliamentary Record

पूनम चंद विश्नोई राजस्थान विधानसभा के प्रमुख संसदीय व्यक्तित्वों में शामिल हैं। उन्होंने विधानसभा के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष दोनों पदों पर कार्य किया।

इसके अलावा उन्हें तीन अलग-अलग अवसरों पर प्रोटेम स्पीकर नियुक्त किया गया था। उपलब्ध रिकॉर्ड के अनुसार वे चौथी, नौवीं और दसवीं विधानसभा के दौरान प्रोटेम स्पीकर रहे।

इसलिए उनके बारे में सबसे सटीक तथ्य यह है कि उन्होंने राजस्थान विधानसभा में अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और प्रोटेम स्पीकर के रूप में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं।


राजस्थान विधानसभा का नया लोगो 2026 | New Logo of Rajasthan Assembly

राजस्थान विधानसभा के 75 वर्ष पूरे होने के अवसर पर 18 मई 2026 को विधानसभा का नया प्रतीक-चिह्न जारी किया गया।

राज्यपाल हरिभाऊ बागड़े ने नए लोगो का विमोचन किया। इसी अवसर पर विधानसभा परिसर के 13 द्वारों के नए नामों का भी अनावरण किया गया।

नए प्रतीक-चिह्न में राजस्थान की प्राकृतिक, सांस्कृतिक और स्थापत्य पहचान को दर्शाया गया है। इसमें निम्नलिखित प्रमुख तत्व शामिल हैं:

  • खेजड़ी
  • रोहिड़ा
  • ऊंट
  • गोडावण
  • राजस्थान विधानसभा भवन

नए लोगो का उद्देश्य राजस्थान की प्राकृतिक विरासत, लोक संस्कृति और लोकतांत्रिक संस्थाओं को एक साथ प्रदर्शित करना है।

महत्वपूर्ण सावधानी

नए प्रतीक-चिह्न से जुड़े संस्कृत ध्येय-वाक्य की वर्तनी विभिन्न स्रोतों में अलग-अलग मिलती है। इसलिए इसे प्रकाशित करते समय राजस्थान विधानसभा या राजभवन द्वारा जारी आधिकारिक लोगो की मूल वर्तनी को ही प्राथमिकता देनी चाहिए।

राजस्थान विधानसभा के 13 नए द्वार | 13 New Gates

18 मई 2026 को राजस्थान विधानसभा परिसर के 13 द्वारों के नए नामों की घोषणा की गई। इनमें पांच प्रमुख आंतरिक द्वार और राजस्थान के विभिन्न सांस्कृतिक क्षेत्रों के नाम पर आठ बाहरी द्वार शामिल हैं।

पांच प्रमुख द्वार

दिशा/प्रवेशनया नामप्रमुख उपयोग
उत्तरी मुख्य द्वारकर्तव्य द्वारराज्यपाल, मुख्यमंत्री, विधानसभा अध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष
दक्षिणी द्वारशक्ति द्वारआम जनता और आगंतुक
पश्चिमी द्वारसुशासन द्वारविधायक
पूर्वी द्वारसंकल्प द्वारअधिकारी
उत्तरी मंदिर द्वारशौर्य द्वारविशिष्ट अतिथि

इन नामों के माध्यम से विधानसभा के प्रवेश मार्गों को लोकतांत्रिक मूल्यों और राजस्थान की सांस्कृतिक पहचान से जोड़ा गया है।

आठ क्षेत्रीय द्वार

राजस्थान विधानसभा के आठ बाहरी द्वारों के नाम प्रमुख सांस्कृतिक और ऐतिहासिक क्षेत्रों के आधार पर रखे गए हैं:

  1. बृज द्वार
  2. शेखावाटी द्वार
  3. वागड़ द्वार
  4. मेवाड़ द्वार
  5. मारवाड़ द्वार
  6. हाड़ौती द्वार
  7. मेरवाड़ा द्वार
  8. ढूंढाड़ द्वार

इस प्रकार राजस्थान विधानसभा के कुल 13 द्वार राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था और क्षेत्रीय विविधता का प्रतिनिधित्व करते हैं।


राजस्थान विधानसभा और NeVA | Digital Rajasthan Assembly

राजस्थान विधानसभा ने विधायी कार्यों को डिजिटल बनाने के लिए National e-Vidhan Application (NeVA) को अपनाया है।

NeVA एक डिजिटल और workflow-based प्लेटफॉर्म है, जिसका उद्देश्य विधानसभा की कार्यवाही को अधिक पारदर्शी, व्यवस्थित और paperless बनाना है।

इसके माध्यम से निम्नलिखित कार्यों को डिजिटल रूप दिया जा रहा है:

  • विधानसभा प्रश्न
  • ध्यानाकर्षण प्रस्ताव
  • विधेयक
  • motions और notices
  • सदन की कार्यवाही
  • सरकारी विभागों के जवाब
  • सदस्यों की प्रोफाइल
  • आश्वासन और याचिकाएं
  • पुराने विधायी रिकॉर्ड

विधानसभा में iPad की सुविधा

2025 में राजस्थान विधानसभा के सदस्यों की सीटों पर डिजिटल उपकरण लगाए गए। प्रत्येक विधायक की सीट पर iPad उपलब्ध कराया गया, जिससे विधानसभा से संबंधित दस्तावेज और कार्यवाही डिजिटल रूप में देखी जा सके।

2025 के बजट सत्र से NeVA आधारित डिजिटल कार्यप्रणाली को लागू करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया गया। सरकारी विभागों को विधानसभा के प्रश्नों, ध्यानाकर्षण प्रस्तावों, विशेष उल्लेख, आश्वासन और याचिकाओं से संबंधित जवाब NeVA के माध्यम से ऑनलाइन भेजने की व्यवस्था की गई।

NeVA का पूरा नाम

NeVA: National e-Vidhan Application


राजस्थान विधानसभा का डिजिटल संग्रहालय | Digital Museum

राजस्थान विधानसभा परिसर में एक डिजिटल संग्रहालय भी स्थापित किया गया है। इसका प्रवेश गेट नंबर 7 से होता है।

इस संग्रहालय में राजस्थान के राजनीतिक, सामाजिक और संवैधानिक इतिहास को आधुनिक तकनीक के माध्यम से प्रस्तुत किया गया है।

डिजिटल संग्रहालय में उपयोग की गई तकनीक

  • 3D Projection Mapping
  • Virtual Reality (VR)
  • Interactive Kiosks
  • Animated Diorama
  • Hologram
  • डिजिटल ऑडियो-विजुअल प्रस्तुति

संग्रहालय में राजस्थान का निर्माण, रियासतों का योगदान, स्वतंत्रता आंदोलन, राजस्थान विधानसभा का गठन, जनजातीय आंदोलन और निर्वाचन प्रणाली से संबंधित जानकारी प्रदर्शित की गई है।

संग्रहालय में प्रवेश निःशुल्क है। सामान्यतः इसका समय सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक रहता है। विधानसभा सत्र के दौरान इसके खुलने का समय सत्र की बैठकों के अनुसार बदल सकता है।


16वीं राजस्थान विधानसभा की वर्तमान स्थिति | 16th Rajasthan Assembly

दिसंबर 2023 के विधानसभा चुनाव के बाद 16वीं राजस्थान विधानसभा का गठन हुआ। वर्तमान में विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी हैं।

आधिकारिक पार्टी स्थिति के अनुसार 16वीं राजस्थान विधानसभा में दलवार सीटों का विवरण इस प्रकार है:

दल/श्रेणीसीटें
भारतीय जनता पार्टी (BJP)118
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (INC)67
भारत आदिवासी पार्टी (BAP)4
बहुजन समाज पार्टी (BSP)2
निर्दलीय8
राष्ट्रीय लोक दल (RLD)1
कुल200

16वीं राजस्थान विधानसभा के प्रमुख पदाधिकारी

  • विधानसभा अध्यक्ष: वासुदेव देवनानी
  • मुख्यमंत्री: भजन लाल शर्मा
  • उपमुख्यमंत्री: दीया कुमारी और प्रेमचंद बैरवा
  • नेता प्रतिपक्ष: टीकाराम जूली
  • कुल विधानसभा सीटें: 200
  • महिला विधायक: 21

राजस्थान विधानसभा की संवैधानिक भूमिकाएं | Constitutional Functions

राजस्थान विधानसभा राज्य की लोकतांत्रिक व्यवस्था का महत्वपूर्ण अंग है। इसका कार्य केवल कानून बनाना नहीं, बल्कि सरकार की जवाबदेही सुनिश्चित करना भी है।

1. कानून निर्माण

राज्य सूची और समवर्ती सूची से जुड़े विषयों पर विधेयकों पर चर्चा करना और उन्हें पारित करना विधानसभा का प्रमुख कार्य है।

2. बजट पर नियंत्रण

राज्य सरकार के बजट, अनुदानों की मांग और विनियोग विधेयक से संबंधित प्रक्रियाओं में विधानसभा की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।

3. कार्यपालिका पर नियंत्रण

विधायक प्रश्नकाल, ध्यानाकर्षण प्रस्ताव, स्थगन प्रस्ताव, विशेष उल्लेख और अन्य संसदीय प्रक्रियाओं के माध्यम से सरकार से जवाब मांगते हैं।

4. जनता की समस्याओं को उठाना

विधानसभा जनता और सरकार के बीच लोकतांत्रिक संवाद का प्रमुख मंच है। विधायक अपने निर्वाचन क्षेत्रों की समस्याओं को सदन में उठाते हैं।

5. समितियों के माध्यम से निगरानी

विधानसभा की विभिन्न समितियां सरकारी विभागों, योजनाओं और वित्तीय कार्यों की समीक्षा करती हैं।


राजस्थान विधानसभा के महत्वपूर्ण तथ्य | Important Facts

  • राजस्थान विधानसभा का गठन: 23 फरवरी 1952
  • पहली बैठक: 29 मार्च 1952
  • पहला विधानसभा भवन: सवाई मानसिंह टाउन हॉल, जयपुर
  • प्रथम विधानसभा की सदस्य संख्या: 160
  • वर्तमान विधानसभा की सदस्य संख्या: 200
  • प्रथम अध्यक्ष: नरोत्तम लाल जोशी
  • प्रथम उपाध्यक्ष: लाल सिंह शक्तावत
  • प्रथम निर्वाचित मुख्यमंत्री: टीकाराम पालीवाल
  • प्रथम महिला विधायक: यशोदा देवी
  • प्रथम महिला मंत्री: कमला बेनीवाल
  • प्रथम महिला अध्यक्ष: सुमित्रा सिंह
  • सबसे लंबे समय तक अध्यक्ष रहने वाले प्रमुख नेता: रामनिवास मिर्धा
  • वर्तमान विधानसभा: 16वीं राजस्थान विधानसभा
  • वर्तमान अध्यक्ष: वासुदेव देवनानी
  • वर्तमान मुख्यमंत्री: भजन लाल शर्मा
  • महिला विधायक: 21
  • SC आरक्षित सीटें: 34
  • ST आरक्षित सीटें: 25
  • कुल विधानसभा सीटें: 200
  • डिजिटल प्रणाली: NeVA
  • NeVA का पूरा नाम: National e-Vidhan Application
  • नए लोगो का विमोचन: 18 मई 2026
  • नए नाम वाले द्वार: 13
  • डिजिटल संग्रहालय का प्रवेश: गेट नंबर 7

राजस्थान विधानसभा से जुड़े अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न | FAQs

  • राजस्थान विधानसभा में कुल कितनी सीटें हैं?

राजस्थान विधानसभा में कुल 200 सीटें हैं।

  • राजस्थान विधानसभा का गठन कब हुआ था?

राजस्थान विधानसभा का गठन 23 फरवरी 1952 को हुआ था।

  • राजस्थान विधानसभा की पहली बैठक कब हुई थी?

राजस्थान विधानसभा की पहली बैठक 29 मार्च 1952 को सवाई मानसिंह टाउन हॉल, जयपुर में हुई थी।

  • राजस्थान विधानसभा के प्रथम अध्यक्ष कौन थे?

राजस्थान विधानसभा के प्रथम अध्यक्ष नरोत्तम लाल जोशी थे।

  • राजस्थान के प्रथम निर्वाचित मुख्यमंत्री कौन थे?

राजस्थान के प्रथम निर्वाचित मुख्यमंत्री टीकाराम पालीवाल थे।

  • राजस्थान की प्रथम महिला विधायक कौन थीं?

राजस्थान की प्रथम महिला विधायक यशोदा देवी थीं।

राजस्थान विधानसभा की प्रथम महिला अध्यक्ष कौन थीं?

राजस्थान विधानसभा की प्रथम महिला अध्यक्ष सुमित्रा सिंह थीं।

  • राजस्थान विधानसभा में SC और ST के लिए कितनी सीटें आरक्षित हैं?

SC के लिए 34 और ST के लिए 25 सीटें आरक्षित हैं।

  • राजस्थान विधानसभा के नए लोगो का विमोचन कब हुआ?

राजस्थान विधानसभा के नए लोगो का विमोचन 18 मई 2026 को हुआ।

  • राजस्थान विधानसभा में कितने नए द्वारों के नाम रखे गए?

राजस्थान विधानसभा परिसर के 13 द्वारों के नए नाम रखे गए।

  • NeVA का पूरा नाम क्या है?

NeVA का पूरा नाम National e-Vidhan Application है।


निष्कर्ष | Conclusion

राजस्थान विधानसभा का इतिहास राज्य के लोकतांत्रिक विकास और राजस्थान के एकीकरण से जुड़ा हुआ है। 1952 में 160 सदस्यों वाली पहली विधानसभा से शुरू हुई यह यात्रा आज 200 सदस्यीय विधानसभा तक पहुंच चुकी है।

जयपुर स्थित राजस्थान विधानसभा भवन में राजस्थानी स्थापत्य कला, आधुनिक सुविधाओं और डिजिटल तकनीक का प्रभावी संयोजन दिखाई देता है। 2026 में विधानसभा के 75 वर्ष पूरे होने के अवसर पर नए प्रतीक-चिह्न और 13 द्वारों के नामकरण ने इसकी सांस्कृतिक पहचान को और मजबूत किया।

NeVA के माध्यम से राजस्थान विधानसभा विधायी कार्यों को paperless और digital बनाने की दिशा में आगे बढ़ रही है। डिजिटल संग्रहालय राज्य के राजनीतिक और संवैधानिक इतिहास को आधुनिक तकनीक के माध्यम से लोगों तक पहुंचाता है।

प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए राजस्थान विधानसभा के गठन की तिथि, पहली बैठक, सीटों का विकास, प्रथम अध्यक्ष, प्रथम महिला विधायक, आरक्षित सीटें, 16वीं विधानसभा, 13 नए द्वार, नया लोगो और NeVA सबसे महत्वपूर्ण विषय हैं।

राजस्थान के मुख्यमंत्री राज्य की मंत्रिपरिषद के प्रमुख होते हैं। मुख्यमंत्री और मंत्रिपरिषद के गठन, संरचना, कार्य एवं सामूहिक उत्तरदायित्व को विस्तार से समझने के लिए पढ़ें — राजस्थान के मुख्यमंत्री

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