Digital illustration of a Rajput warrior on a white horse, featuring the Vijay Stambha tower and a hill fort under a golden sunset.

Rajasthan History In Hindi Guide:

राजस्थान… वीरों की भूमि, जौहर की ज्वाला और स्वाभिमान का प्रतीक। यहाँ का इतिहास केवल राजा-रानियों की कहानियां नहीं, बल्कि संघर्ष और बलिदान की एक ऐसी गाथा है जिसे पढ़कर हर भारतीय का सीना गर्व से चौड़ा हो जाता है।

अगर आप प्रतियोगी परीक्षाओं (RAS, REET, Police) की तैयारी कर रहे हैं या इतिहास में रुचि रखते हैं, तो यह Master Guide आपके लिए है। यहाँ हमने राजस्थान के इतिहास को 8 प्रमुख भागों (Chapters) में पिरोया है।

1: राजपूतों की उत्पत्ति: ऐतिहासिक सच और प्रमुख सिद्धांत

इतिहासकारों के बीच यह सबसे बड़ा बहस का मुद्दा रहा है कि आखिर राजपूत कौन थे और कहाँ से आए?

  • अग्निकुंड सिद्धांत: चन्दबरदाई के ‘पृथ्वीराज रासो’ के अनुसार, ऋषि वशिष्ठ ने आबू पर्वत पर यज्ञ किया जिससे चार योद्धा निकले—प्रतिहार, परमार, चालुक्य और चौहान।
  • विदेशी मत: कर्नल टॉड जैसे इतिहासकारों ने उन्हें शक और सीथियन (विदेशी जातियों) का वंशज माना है।
  • सूर्यवंशी/चंद्रवंशी: प्राचीन भारतीय ग्रंथों और शिलालेखों के अनुसार वे क्षत्रिय हैं।

इस अध्याय में हमने सभी सिद्धांतों (Theories) का वैज्ञानिक विश्लेषण किया है।

👉 [Read Full Post] राजपूतों की उत्पत्ति का पूरा सच और सिद्धांत यहाँ पढ़ें।

2.गुर्जर-प्रतिहार वंश का इतिहास (Gurjar-Pratihara Dynasty)

जब भारत पर अरब आक्रमण हो रहे थे, तब उत्तर भारत की रक्षा दीवार बनकर जिस वंश ने की, वह था गुर्जर-प्रतिहार वंश

  • संस्थापक: हरिश्चंद्र (आदि पुरुष) और नागभट्ट प्रथम (वास्तविक संस्थापक)।
  • त्रिपक्षीय संघर्ष (Tripartite Struggle): कन्नौज पर अधिकार के लिए पाल, राष्ट्रकूट और प्रतिहारों के बीच 100 साल युद्ध चला, जिसमें अंततः प्रतिहार जीते।
  • मिहिर भोज: इस वंश का सबसे प्रतापी राजा, जिसने ‘आदिवराह’ की उपाधि ली।

👉 [Read Full Post] गुर्जर-प्रतिहार वंश और उनके प्रमुख शासकों का इतिहास यहाँ पढ़ें।

3: चौहान वंश – उत्पत्ति और पृथ्वीराज चौहान (Chauhan Dynasty)

सांभर (शाकम्भरी) झील के किनारे शुरू हुआ चौहान वंश अजमेर और फिर दिल्ली तक पहुँचा।

  • अजयराज: इन्होंने ‘अजमेर’ नगर बसाया।
  • विग्रहराज चतुर्थ: इनका काल चौहानों का ‘स्वर्ण काल’ माना जाता है।
  • पृथ्वीराज चौहान (III): अंतिम हिन्दू सम्राट। मुहम्मद गौरी के साथ उनके तराइन के युद्ध (1191, 1192) इतिहास के पन्नों में दर्ज हैं।

क्या पृथ्वीराज को शब्दभेदी बाण चलाना आता था? संयोगिता की कहानी कितनी सच है?

👉 [Read Full Post] चौहान वंश का इतिहास और महत्वपूर्ण प्रश्न यहाँ देखें।

4: मेवाड़ राजवंश – बप्पा रावल से कुंभा तक (Mewar: The Beginning)

दुनिया के सबसे लंबे समय तक चलने वाले ‘गुहिल वंश’ की कहानी यहीं से शुरू होती है।

  • बप्पा रावल (734 ई.): जिन्होंने अरबों को हराकर चित्तौड़ जीता।
  • रावल रतन सिंह (1303 ई.): अलाउद्दीन खिलजी का आक्रमण और रानी पद्मिनी का जौहर।
  • राणा हम्मीर: मेवाड़ का उद्धारक।
  • महाराणा कुंभा: मेवाड़ का स्वर्ण युग, जिन्होंने विजय स्तम्भ और कुम्भलगढ़ बनवाया।

👉 [Read Full Post] बप्पा रावल से कुंभा तक का विस्तृत इतिहास यहाँ पढ़ें।

5: महाराणा सांगा, खानवा का युद्ध और उदय सिंह (Sanga to Udai Singh)

कुंभा के बाद मेवाड़ के सिंहासन पर महाराणा सांगा बैठे, जिनके शरीर पर 80 घाव थे।

  • खानवा का युद्ध (1527): बाबर और सांगा के बीच हुआ वह युद्ध जिसने भारत की तकदीर बदल दी।
  • पन्ना धाय: सांगा के बाद, पन्ना धाय ने अपने बेटे का बलिदान देकर कुंवर उदय सिंह की जान बचाई।
  • उदय सिंह: इन्होंने 1559 में उदयपुर बसाया, लेकिन 1568 में अकबर ने चित्तौड़ पर कब्जा कर लिया (तीसरा साका)।

👉 [Read Full Post] खानवा युद्ध और पन्ना धाय के बलिदान की कहानी यहाँ पढ़ें।

6: महाराणा प्रताप और हल्दीघाटी का युद्ध (The Legend of Pratap)

यह अध्याय मेवाड़ के स्वाभिमान का शिखर है।

  • राज्याभिषेक: महाराणा प्रताप ने कसम खाई थी कि जब तक चित्तौड़ नहीं मिलेगा, वे महलों में नहीं रहेंगे।
  • हल्दीघाटी (1576): इतिहास का वह युद्ध जहाँ प्रताप का भाला और चेतक की वफादारी देखने को मिली।
  • दिवेर का युद्ध: जिसे ‘मेवाड़ का मैराथन’ कहा जाता है, जहाँ से प्रताप की विजय यात्रा शुरू हुई।

👉 [Read Full Post] हल्दीघाटी युद्ध और चेतक की पूरी दास्तान यहाँ पढ़ें।

7: मेवाड़-मुगल संधि और महाराणा राज सिंह (Treaty & Rebellion)

लगातार युद्धों के बाद 1615 में अमर सिंह के समय मेवाड़-मुगल संधि हुई। लेकिन शेर ज्यादा दिन शांत नहीं रहा।

  • महाराणा राज सिंह: इन्होंने औरंगज़ेब को खुली चुनौती दी।
  • चारुमती विवाद: औरंगज़ेब के फरमान को ठुकराकर राजकुमारी से विवाह किया।
  • श्रीनाथ जी: जब औरंगज़ेब मूर्तियां तोड़ रहा था, तब राज सिंह ने ही श्रीनाथ जी (नाथद्वारा) को शरण दी।

👉 [Read Full Post] मेवाड़-मुगल संधि और राज सिंह के विद्रोह की कहानी यहाँ पढ़ें।

8: Modern Mewar And Integration (आधुनिक इतिहास)

यह हमारे इतिहास का अंतिम पड़ाव है।

  • मराठा और अंग्रेज: मुगलों के बाद मेवाड़ को मराठों और फिर 1818 में अंग्रेजों से संधि करनी पड़ी।
  • कृष्णा कुमारी विवाद: मेवाड़ इतिहास का एक दुखद अध्याय।
  • एकीकरण (1948): आज़ादी के बाद, महाराणा भूपाल सिंह ने कहा था- “मेवाड़ का फैसला मेरे पूर्वज कर चुके हैं।” और 18 अप्रैल 1948 को मेवाड़ का राजस्थान में विलय हो गया।

👉 [Read Full Post] आधुनिक मेवाड़ और एकीकरण का इतिहास यहाँ पढ़ें।

निष्कर्ष (Conclusion)

राजस्थान का इतिहास हमें सिखाता है कि परिस्थितियाँ बदलती रहती हैं, लेकिन सिद्धांत और स्वाभिमान अजर-अमर रहते हैं। बप्पा रावल से लेकर महाराणा भूपाल सिंह तक, हर शासक ने अपनी भूमिका निभाई।

हमें उम्मीद है कि यह History Series आपके ज्ञान को बढ़ाएगी और प्रतियोगी परीक्षाओं में आपकी मदद करेगी।

4 thoughts on “Rajasthan History In Hindi Guide:”

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