राजस्थान के रेतीले धोरों के बीच इतिहास की एक ऐसी परत दबी हुई है, जिसने पूरी दुनिया को हैरान कर दिया। हनुमानगढ़ जिले में स्थित कालीबंगा (Kalibangan) सभ्यता न केवल सिंधु घाटी सभ्यता का एक हिस्सा है, बल्कि यह अपनी विशिष्ट परंपराओं और खोजों के कारण विश्व इतिहास में एक अलग स्थान रखती है।
1. कालीबंगा का परिचय और नामकरण (Introduction and Nomenclature of Kalibangan)
- शाब्दिक अर्थ: ‘कालीबंगा’ शब्द पंजाबी और सिंधी भाषा के शब्द ‘बंगा’ से बना है, जिसका अर्थ होता है “काले रंग की चूड़ियाँ” (Black Bangles)। खुदाई के दौरान यहाँ बड़ी संख्या में काली मिट्टी और कांच की चूड़ियों के टुकड़े मिले थे।
- स्थान (Location): यह वर्तमान राजस्थान के हनुमानगढ़ जिले (तत्कालीन श्रीगंगानगर) में स्थित है।
- नदी तट (River Bank): यह प्राचीन सरस्वती नदी के तट पर स्थित थी, जिसे वर्तमान में घग्घर (Ghaggar) नदी के नाम से जाना जाता है। इसे ‘मृत नदी’ (Dead River) भी कहा जाता है।
2. खोज और उत्खनन का इतिहास (History of Discovery and Excavation)
कालीबंगा की खोज का श्रेय कई विद्वानों को जाता है:
प्रथम पहचान: सबसे पहले 1917 में एल.पी. टेसिटोरी (L.P. Tessitori) ने इस पुरातात्विक स्थल की ओर संकेत किया था।
खोज (Discovery): विधिवत खोज 1951-1953 के दौरान अमलानंद घोष (Amlanand Ghosh) द्वारा की गई।
विस्तृत उत्खनन (Main Excavation): 1961 से 1969 के बीच बी.बी. लाल (B.B. Lal) और बी.के. थापर (B.K. Thapar) के नेतृत्व में यहाँ बड़े पैमाने पर खुदाई हुई। उनके साथ एम.डी. खरे, जे.पी. जोशी और श्रीवास्तव भी शामिल थे।
3. कालक्रम और संस्कृति के चरण (Chronology and Phases of Culture)
कालीबंगा की खुदाई में दो अलग-अलग सांस्कृतिक चरणों के प्रमाण मिले हैं, जो इसे अन्य स्थलों से अलग बनाते हैं:
- प्राक-हड़प्पा चरण (Pre-Harappan Phase): यह हड़प्पा सभ्यता से भी पुराना समय है। यहाँ से जुते हुए खेत के साक्ष्य मिले हैं।
- हड़प्पा कालीन चरण (Mature Harappan Phase): यह विकसित नगरीय सभ्यता का दौर था, जिसमें ग्रिड प्रणाली पर आधारित मकान मिले हैं।
- दशरथ शर्मा का मत: प्रसिद्ध इतिहासकार डॉ. दशरथ शर्मा ने कालीबंगा को ‘सिंधु घाटी साम्राज्य की तीसरी राजधानी‘ (Third Capital) कहा है।
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4. प्रमुख विशेषताएं और पुरातात्विक साक्ष्य (Main Features and Archaeological Evidences)
कालीबंगा से ऐसी कई चीजें मिली हैं जो दुनिया में कहीं और नहीं पाई गईं:
अ. विश्व का प्राचीनतम जुता हुआ खेत (World’s Oldest Ploughed Field)
कालीबंगा की सबसे बड़ी विशेषता यहाँ से मिला जुता हुआ खेत है। यह प्राक-हड़प्पा काल का है। यहाँ एक साथ दो फसलें उगाने (Mixed Cropping) के प्रमाण मिले हैं (जैसे सरसों और चना)।
ब. अग्नि वेदिकाएं / हवन कुंड (Fire Altars)
यहाँ एक ऊँचे चबूतरे पर 7 अग्नि वेदिकाएं मिली हैं। इससे पता चलता है कि यहाँ के लोग धार्मिक अनुष्ठानों और यज्ञों में विश्वास रखते थे। यहाँ जानवरों की हड्डियों के साक्ष्य भी मिले हैं, जो बलि प्रथा की ओर संकेत करते हैं।
स. भूकंप के प्राचीनतम साक्ष्य (Earliest Evidence of Earthquake)
विश्व में भूकंप के सबसे पुराने प्रमाण कालीबंगा से ही प्राप्त हुए हैं। मकानों की दीवारों में पड़ी दरारें इस बात की पुष्टि करती हैं।
द. शल्य चिकित्सा (Evidence of Surgery)
यहाँ से एक बालक की खोपड़ी मिली है, जिसमें 6 छेद थे। इतिहासकारों का मानना है कि यह ‘हाइड्रोसेफलस’ बीमारी या प्राचीन काल की ‘मस्तिष्क शल्य चिकित्सा’ (Trephination) का प्रमाण है।
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5. नगर नियोजन और भवन निर्माण (Town Planning and Construction)
कालीबंगा का नगर नियोजन सिंधु सभ्यता के अन्य शहरों के समान था, लेकिन कुछ भिन्नताएं भी थीं:
- कच्ची ईंटों का प्रयोग: जहाँ मोहनजोदड़ो और हड़प्पा में पकी हुई ईंटों का अधिक प्रयोग था, वहीं कालीबंगा में अधिकांश मकान कच्ची ईंटों (Mud Bricks) से बने थे। इसीलिए इसे “दीन-हीन बस्ती” (Poor Settlement) भी कहा जाता है।
- अलंकृत ईंटें: विश्व में केवल कालीबंगा से ही अलंकृत (Decorated) फर्श और ईंटों के साक्ष्य मिले हैं।
- जल निकासी प्रणाली: यहाँ की नालियां लकड़ी (Wooden Drainage) और ईंटों से बनी थीं। लकड़ी की नालियों का प्रयोग केवल कालीबंगा में ही देखने को मिलता है।
- दरवाजे: घरों के दरवाजे मुख्य सड़क पर न खुलकर पीछे की गलियों में खुलते थे।
6. सामाजिक और आर्थिक जीवन (Social and Economic Life)
पशुपालन और कृषि (Animal Husbandry and Farming)
- कालीबंगा के लोग ऊँट से परिचित थे (राजस्थान की पहचान)। यहाँ से ऊँट की हड्डियाँ प्रचुर मात्रा में मिली हैं।
- यहाँ के लोग गाय, भैंस, सुअर और पालतू कुत्ते भी रखते थे।
व्यापार (Trade)
- यहाँ से बेलनाकार मुहरें (Cylindrical Seals) मिली हैं, जो मेसोपोटामिया (ईराक) की सभ्यता के समान हैं। यह साबित करता है कि कालीबंगा का विदेशी व्यापार उन्नत था।
- यहाँ से सूती कपड़े के अवशेष भी मिले हैं।
7. अंत्येष्टि या समाधान संस्कार (Burial Practices)
कालीबंगा में अंतिम संस्कार की तीन विधियाँ प्रचलित थीं:
- पूर्ण समाधीकरण: पूरे शरीर को गड्ढे में दफनाना।
- आंशिक समाधीकरण: शव को पहले पशु-पक्षियों के लिए छोड़ना, फिर अवशेष दफनाना।
- दाह संस्कार: शव को जलाना।
- यहाँ से एक ‘युग्म समाधान’ (Double Burial) भी मिला है, जिसमें दो शव साथ दफनाए गए थे।
8. पतन के कारण (Reasons for Decline)
कालीबंगा के पतन के लिए कई सिद्धांत दिए गए हैं:
- नदी का सूखना: सरस्वती (घग्घर) नदी के मार्ग परिवर्तन या सूखने के कारण यहाँ की जनसंख्या पलायन कर गई।
- भूकंप: दरारों के साक्ष्य बताते हैं कि यहाँ बार-बार भूकंप आए होंगे।
- संक्रामक रोग: कुछ विद्वान महामारी को भी कारण मानते हैं।
संग्रहालय: कालीबंगा से प्राप्त अवशेषों के संरक्षण के लिए सरकार ने 1985-86 में हनुमानगढ़ में एक संग्रहालय स्थापित किया है।
स्वतंत्र भारत का योगदान: स्वतंत्र भारत में उत्खनित होने वाला यह दूसरा सबसे बड़ा हड़प्पा स्थल था (पहला पंजाब का रोपड़ था)।
प्रतीक: स्वास्तिक (Swastika) चिह्न के अवशेष यहाँ से मिले हैं, जो वास्तु दोष दूर करने के लिए प्रयोग किया जाता था।
10. निष्कर्ष (Conclusion)
कालीबंगा सभ्यता राजस्थान के इतिहास की वह कड़ी है, जो हमें हमारे पूर्वजों की उन्नत कृषि, शल्य चिकित्सा और धार्मिक मान्यताओं से जोड़ती है। भले ही यह एक ‘दीन-हीन’ बस्ती कही गई, लेकिन इसके द्वारा दिए गए “जुते हुए खेत” और “अग्नि वेदिकाओं” के साक्ष्य इसे विश्व की सबसे महत्वपूर्ण सभ्यताओं की श्रेणी में खड़ा करते हैं।




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