Introduction
राजस्थान की वीर धरा न केवल अपने शौर्य के लिए जानी जाती है, बल्कि आधुनिक युग में यह ‘महिला सशक्तिकरण’ के क्षेत्र में भी नए आयाम स्थापित कर रही है। राज्य की लगभग आधी आबादी महिलाओं की है, और उनकी सामाजिक, आर्थिक और शैक्षणिक उन्नति के बिना एक विकसित राजस्थान की कल्पना असंभव है। राजस्थान सरकार ने महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने और समाज में उन्हें सम्मानजनक स्थान दिलाने के लिए कई महत्वाकांक्षी योजनाएं शुरू की हैं।
1. इंदिरा महिला शक्ति (आई.एम. शक्ति) निधि (Indira Mahila Shakti – I.M. Shakti Fund)
यह राजस्थान में महिला सशक्तिकरण के लिए सबसे बड़ी ‘अम्ब्रेला योजना’ मानी जाती है।
- घोषणा: 18 दिसंबर 2019 (सरकार के एक वर्ष पूरे होने पर)।
- कुल निधि: ₹1,000 करोड़ (5 वर्षों के लिए)।
- उद्देश्य: महिलाओं को उद्यमिता (Entrepreneurship) से जोड़ना, कौशल विकास करना और उन्हें आर्थिक रूप से स्वतंत्र बनाना।
इस निधि के तहत 5 प्रमुख योजनाएं संचालित हैं:
- आई.एम. शक्ति उद्यम प्रोत्साहन योजना: महिलाओं को स्वयं का उद्योग शुरू करने के लिए ऋण उपलब्ध कराना।
- आई.एम. शक्ति प्रशिक्षण एवं कौशल संवर्धन योजना: महिलाओं को निशुल्क कंप्यूटर प्रशिक्षण (RS-CIT/RS-CFA) देना।
- आई.एम. शक्ति शिक्षा सेतु योजना: ऐसी महिलाएं/बालिकाएं जो शिक्षा छोड़ चुकी हैं, उन्हें दूरस्थ शिक्षा के माध्यम से पुनः शिक्षा से जोड़ना।
- आई.एम. शक्ति सामर्थ्य योजना: विधवा, परित्यक्ता और पीड़ित महिलाओं को कौशल प्रशिक्षण प्रदान करना।
- आई.एम. शक्ति कौशल समर्थ योजना: आधुनिक तकनीकों में महिलाओं को कौशल प्रदान करना।
2. मुख्यमंत्री राजश्री योजना (Mukhya Mantri Rajshri Yojana)
बालिकाओं के जन्म के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित करने और उनकी शिक्षा सुनिश्चित करने के लिए यह एक फ्लैगशिप योजना है।
- प्रारंभ तिथि: 1 जून 2016।
- पात्रता: 1 जून 2016 के बाद जन्म लेने वाली बालिकाएं।
- कुल सहायता: ₹50,000 (छह किश्तों में)।
किश्तों का विवरण (Exam Important):
- जन्म पर: ₹2,500।
- एक वर्ष का टीकाकरण पूर्ण होने पर: ₹2,500।
- राजकीय विद्यालय में प्रथम कक्षा में प्रवेश पर: ₹4,000।
- छठी कक्षा में प्रवेश पर: ₹5,000।
- दसवीं कक्षा में प्रवेश पर: ₹11,000।
- बारहवीं कक्षा उत्तीर्ण करने पर: ₹25,000।
3. ‘उड़ान’ योजना (Udaan Yojana – Free Sanitary Napkin Scheme)
महिलाओं के स्वास्थ्य और स्वच्छता (Menstrual Hygiene) पर केंद्रित यह देश की बड़ी योजनाओं में से एक है।
- प्रारंभ: 19 दिसंबर 2021।
- नारा: “स्वस्थ राजस्थान, सशक्त राजस्थान”।
- प्रावधान: राज्य की सभी किशोरियों और 10 से 45 वर्ष की महिलाओं को प्रतिमाह 12 सेनेटरी नैपकिन निशुल्क प्रदान किए जाते हैं।
- नोडल विभाग: महिला अधिकारिता विभाग।
4. इंदिरा गांधी मातृत्व पोषण योजना (Indira Gandhi Matritva Poshan Yojana)
गर्भवती महिलाओं और धात्री माताओं के पोषण स्तर में सुधार के लिए यह योजना लागू की गई है।
- प्रारंभ: 19 नवंबर 2020 (शुरुआत में 5 जनजाति जिलों में – प्रतापगढ़, डूंगरपुर, बांसवाड़ा, उदयपुर, बारां)।
- विस्तार: अब यह पूरे राजस्थान के सभी 33 (पुराने) और नए जिलों में प्रभावी है।
- प्रावधान: दूसरे बच्चे के जन्म पर महिला को ₹6,000 की वित्तीय सहायता (5 किश्तों में) सीधे बैंक खाते में दी जाती है।
- महत्व: यह योजना राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA-2013) के लक्ष्यों को पूरा करने में सहायक है।
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5. राजस्थान ग्रामीण आजीविका विकास परिषद – ‘राजीविका’ (RAJEEVIKA – Rajasthan Grameen Ajeevika Vikas Parishad)
ग्रामीण महिलाओं को स्वयं सहायता समूहों (SHGs) के माध्यम से संगठित कर उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाना।
- स्थापना: अक्टूबर 2010 (स्वायत्त निकाय के रूप में)।
- अध्यक्ष: मुख्यमंत्री।
- ब्रांड एंबेसडर: रूमा देवी (बाड़मेर की प्रसिद्ध हस्तशिल्प कलाकार)।
- मुख्य कार्य: ‘अमृता हाट’ का आयोजन, ‘लखपति दीदी’ अभियान (हालिया घोषणा) के तहत महिलाओं की आय बढ़ाना।
6. मुख्यमंत्री वर्क फ्रॉम होम – जॉब वर्क योजना (Mukhya Mantri Work From Home – Job Work Scheme)
ऐसी महिलाएं जो पारिवारिक परिस्थितियों के कारण घर से बाहर जाकर नौकरी नहीं कर सकतीं, उन्हें घर बैठे रोजगार देना।
- बजट घोषणा: 2022-23।
- लक्ष्य: प्रतिवर्ष 20,000 महिलाओं को लाभान्वित करना।
- पात्रता: 18 वर्ष से अधिक आयु की महिलाएं।
7. शिक्षा के क्षेत्र में विशेष प्रोत्साहन (Incentives in the Field of Education)
राजस्थान में बालिकाओं के ड्रॉप-आउट रेट को कम करने के लिए ये योजनाएं परीक्षा की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण हैं:
- गार्गी पुरस्कार (Gargi Puraskar): 10वीं और 12वीं कक्षा में 75% या उससे अधिक अंक लाने वाली बालिकाओं को। (बसंत पंचमी को दिया जाता है)।
- बालिका दूरस्थ शिक्षा योजना (Distance Education Scheme): उच्च शिक्षा की पढ़ाई घर बैठे जारी रखने के लिए फीस का पुनर्भुगतान।
- आपकी बेटी योजना (Aapki Beti Yojana): गरीबी रेखा के नीचे (BPL) जीवन यापन करने वाली ऐसी बालिकाएं जिनके माता-पिता में से किसी एक या दोनों का निधन हो गया हो।
- कक्षा 1-8 तक: ₹2,100 वार्षिक।
- कक्षा 9-12 तक: ₹2,500 वार्षिक।
- कालीबाई भील मेधावी छात्रा स्कूटी योजना: विभिन्न वर्गों (ST, SC, OBC, EBC, Minority) की छात्राओं को अंकों के आधार पर स्कूटी वितरण।
8. सुरक्षा और विधिक सशक्तिकरण (Safety and Legal Empowerment)
महिलाओं को सुरक्षित वातावरण प्रदान करने के लिए राजस्थान पुलिस और सरकार के प्रयास:
- महिला शक्ति केंद्र (MSK): जिला स्तर पर महिलाओं के मुद्दों के समाधान के लिए।
- सुरक्षा सखी (Suraksha Sakhi): पुलिस और महिलाओं के बीच विश्वास बढ़ाने के लिए मोहल्लों और गांवों में महिलाओं का समूह।
- अपराजिता (Aparajita): वन स्टॉप सेंटर (OSC) – यहाँ पीड़ित महिलाओं को चिकित्सा, विधिक और परामर्श सहायता एक ही छत के नीचे मिलती है।
9. राजस्थान बजट 2024-25 और महिला सशक्तिकरण
हालिया बजट में महिलाओं के लिए कई महत्वपूर्ण घोषणाएं की गई हैं:
- लखपति दीदी योजना: 5 लाख महिलाओं को स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से लखपति बनाने का लक्ष्य।
- मातृत्व वंदना योजना: पहली संतान के जन्म पर सहायता राशि ₹5000 से बढ़ाकर ₹6500 की गई।
- महिला निधि: राजस्थान महिला निधि (Telangana की तर्ज पर स्थापित) के माध्यम से समूहों को सुलभ ऋण उपलब्ध कराना।
10. सांख्यिकीय आंकड़े: राजस्थान में महिलाओं की स्थिति
परीक्षा में सटीक आंकड़े लिखने से उत्तर प्रभावशाली बनता है (Census 2011 & NFHS-5):
- कुल महिला साक्षरता (Rajasthan): 52.1% (राष्ट्रीय औसत से कम, सुधार की आवश्यकता)।
- सर्वाधिक महिला साक्षरता वाला जिला: कोटा (65.9%)।
- न्यूनतम महिला साक्षरता वाला जिला: जालौर (38.5%)।
- लिंगानुपात (Sex Ratio): 928 (प्रति 1000 पुरुषों पर)।
- शिशु लिंगानुपात (0-6 वर्ष): 888 (चिंता का विषय)।
11. महत्वपूर्ण संस्थान (Important Institutions)
- राज्य महिला आयोग: स्थापना – 15 मई 1999 (जयपुर)। वर्तमान अध्यक्ष की नियुक्ति सरकार द्वारा समय-समय पर की जाती है।
- महिला अधिकारिता निदेशालय: इसकी स्थापना 18 जून 2007 को की गई ताकि योजनाओं का क्रियान्वयन प्रभावी हो सके।
12. निष्कर्ष (Conclusion)
राजस्थान में महिला सशक्तिकरण के प्रयास केवल कागजों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि ‘राजीविका’ के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों और ‘आई.एम. शक्ति’ के माध्यम से शहरी क्षेत्रों में बदलाव दिख रहा है। हालांकि, कम महिला साक्षरता और सामाजिक कुरीतियों (जैसे बाल विवाह) जैसी चुनौतियां अभी भी मौजूद हैं। सरकार की योजनाओं का सफल क्रियान्वयन और जागरूक नागरिक समाज ही राजस्थान की महिलाओं को वास्तव में “शक्ति” प्रदान कर सकता है।


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