A dual-themed collage featuring Rajasthan's freedom fighters in vintage sepia on the left and modern politicians in color on the right, centered around a map of Rajasthan with bilingual titles.

Prominent Personalities of Rajasthan: Freedom Fighters and Politicians राजस्थान के प्रमुख व्यक्तित्व: स्वतंत्रता सेनानी और राजनेता

राजस्थान की धरती न केवल अपने किलों और महलों के लिए प्रसिद्ध है, बल्कि यह उन शूरवीरों और दूरदर्शी राजनेताओं की जन्मस्थली भी रही है जिन्होंने भारत की स्वतंत्रता और आधुनिक राजस्थान के निर्माण में अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया। इस लेख में हम राजस्थान के उन महान नायकों के बारे में जानेंगे जिनके बिना प्रदेश का इतिहास अधूरा है।

प्रमुख स्वतंत्रता सेनानी (Major Freedom Fighters of Rajasthan)

विजय सिंह पथिक (Vijay Singh Pathik) – ‘राष्ट्रीय पथिक’

विजय सिंह पथिक को भारत में ‘किसान आंदोलन का जनक’ माना जाता है। उन्होंने राजस्थान में जन-जागृति फैलाने में मुख्य भूमिका निभाई।

  • मूल नाम: भूप सिंह (बुलंदशहर, यूपी)।
  • प्रमुख कार्य: बिजोलिया किसान आंदोलन का सफल नेतृत्व किया।
  • संस्थाएं: 1919 में वर्धा में ‘राजस्थान सेवा संघ’ की स्थापना की।
  • समाचार पत्र: ‘राजस्थान केसरी’ (वर्धा) और ‘नवीन राजस्थान’ (अजमेर) का संपादन किया।
  • महत्वपूर्ण तथ्य: इन्होंने ‘टॉडगढ़ जेल’ से फरार होने के बाद अपना नाम बदलकर विजय सिंह पथिक रख लिया था।

अर्जुन लाल सेठी (Arjun Lal Sethi) – ‘जयपुर के शेर’

जयपुर में राष्ट्रीयता की अलख जगाने वाले पहले व्यक्ति अर्जुन लाल सेठी थे।

  • प्रमुख कार्य: इन्होंने जयपुर में ‘वर्धमान पाठशाला’ की स्थापना की, जो क्रांतिकारियों का प्रशिक्षण केंद्र थी।
  • प्रसिद्ध कथन: “अगर अर्जुन लाल नौकरी करेगा, तो अंग्रेजों को भारत से बाहर कौन निकालेगा?” (इन्होंने जिलाधीश का पद ठुकरा दिया था)।
  • साहित्य: ‘शूद्र मुक्ति’, ‘स्त्री मुक्ति’ और ‘महेन्द्र कुमार’ नामक पुस्तकें लिखीं।
  • जेल प्रवास: निमेज हत्याकांड के आरोप में उन्हें वेल्लूर जेल में रखा गया था।

केसरी सिंह बारहट (Kesari Singh Barahath)

राजस्थान का एक ऐसा परिवार जहाँ पूरा का पूरा परिवार ही स्वतंत्रता संग्राम में शहीद हो गया।

  • प्रसिद्ध रचना: ‘चेतावनी रा चूंगट्या’ (13 सोरठे)। इन्होंने 1903 में मेवाड़ महाराणा फतेह सिंह को दिल्ली दरबार में जाने से रोकने के लिए यह रचना लिखी थी।
  • संस्था: 1910 में ‘वीर भारत सभा’ का गठन किया।
  • विशेष: इनके पुत्र प्रताप सिंह बारहट और भाई जोरावर सिंह बारहट भी महान क्रांतिकारी थे।

सागरमल गोपा (Sagarmal Gopa)

जैसलमेर में राजशाही और अंग्रेजी हुकूमत के विरुद्ध आवाज उठाने वाले क्रांतिकारी।

  • प्रसिद्ध पुस्तकें: ‘जैसलमेर का गुंडाराज’ और ‘आजादी के दीवाने’।
  • बलिदान: जेल में अमानवीय यातनाएं दी गईं और 3 अप्रैल 1946 को उन्हें जिंदा जला दिया गया।
  • जांच आयोग: इनकी मृत्यु की जांच के लिए ‘गोपाल स्वरूप पाठक आयोग’ का गठन किया गया था।

जोरावर सिंह बारहट (Zoravar Singh Barahath) – ‘राजस्थान के चंद्रशेखर’

  • प्रमुख घटना: 1912 के दिल्ली चांदनी चौक बम कांड (लॉर्ड हार्डिंग पर बम फेंकना) में शामिल थे।
  • विशेष: ये जीवन भर अंग्रेजों की पकड़ में नहीं आए, इसलिए इन्हें ‘राजस्थान का चंद्रशेखर’ कहा जाता है।

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प्रमुख राजनेता और आधुनिक राजस्थान के निर्माता (Prominent Politicians)

हीरालाल शास्त्री (Heeralal Shastri) – ‘प्रथम मुख्यमंत्री’

  • परिचय: राजस्थान के प्रथम मनोनीत मुख्यमंत्री (7 अप्रैल 1949)।
  • संस्था: निवाई (टोंक) में ‘जीवन कुटीर’ की स्थापना की, जिसे आज ‘वनस्थली विद्यापीठ’ के नाम से जाना जाता है।
  • समझौता: 1942 में जयपुर रियासत के पीएम मिर्जा इस्माइल के साथ ‘जेंटलमैन एग्रीमेंट’ किया।
  • आत्मकथा: ‘प्रत्यक्ष जीवन शास्त्र’।
  • गीत: प्रसिद्ध गीत ‘प्रलय प्रतीक्षा नमो नमः’ इन्हीं के द्वारा रचित है।

जय नारायण व्यास (Jai Narayan Vyas) – ‘शेर-ए-राजस्थान’

  • परिचय: राजस्थान के एकमात्र ऐसे मुख्यमंत्री जो ‘मनोनीत’ और ‘निर्वाचित’ दोनों रहे।
  • उपनाम: लोकनायक, धुनी के धणी, लकड़ और कक्कड़।
  • समाचार पत्र: ‘अग्निबाण’ (राजस्थानी भाषा का प्रथम राजनीतिक समाचार पत्र), ‘पीप’ (अंग्रेजी) और ‘तरुण राजस्थान’।
  • आंदोलन: मारवाड़ प्रजामंडल की स्थापना की और सामंतवाद के खिलाफ संघर्ष किया।

मोहन लाल सुखाड़िया (Mohan Lal Sukhadia) – ‘आधुनिक राजस्थान के निर्माता’

  • कार्यकाल: राजस्थान के सर्वाधिक समय तक (लगभग 17 वर्ष) मुख्यमंत्री रहने का रिकॉर्ड।
  • योगदान: राजस्थान में पंचायती राज व्यवस्था लागू करने और संभागीय व्यवस्था को समाप्त (1962) करने में इनकी भूमिका रही।
  • नीति: इन्हें आधुनिक राजस्थान का निर्माता कहा जाता है क्योंकि इनके काल में औद्योगिक और बुनियादी ढाँचे का बहुत विकास हुआ।

भैरों सिंह शेखावत (Bhairon Singh Shekhawat) – ‘बाबोसा’

  • पद: राजस्थान के पहले गैर-कांग्रेसी मुख्यमंत्री और भारत के उपराष्ट्रपति।
  • योजना: ‘अंत्योदय योजना’ शुरू करने का श्रेय इन्हें ही जाता है, जिसकी प्रशंसा विश्व बैंक ने भी की थी।
  • विशेष: इन्हें राजस्थान की राजनीति का ‘चाणक्य’ और ‘बाबोसा’ कहा जाता है।

जमुनालाल बजाज (Jamnalal Bajaj) – ‘गांधीजी के पांचवें पुत्र’

  • परिचय: प्रसिद्ध उद्योगपति और स्वतंत्रता सेनानी।
  • उपनाम: खुद को ‘गुलाम नंबर 4’ कहते थे।
  • योगदान: जयपुर प्रजामंडल का पुनर्गठन किया और ‘चरखा संघ’ की स्थापना की।
  • पद: कांग्रेस के कोषाध्यक्ष रहे और गांधीजी के सिद्धांतों का प्रचार किया।

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महिला व्यक्तित्व (Distinguished Women Personalities)

अंजना देवी चौधरी (Anjana Devi Chaudhary)

  • महत्व: राजस्थान की प्रथम महिला जो स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान ‘गिरफ्तार’ हुईं।
  • कार्य: बिजोलिया और बेेंगू किसान आंदोलनों में महिलाओं का नेतृत्व किया।

किशोरी देवी (Kishori Devi)

  • ऐतिहासिक घटना: 1934 में ‘कटराथल’ (सीकर) में एक विशाल महिला सम्मेलन आयोजित किया, जिसमें 10,000 महिलाओं ने भाग लिया। यह सम्मेलन सीहोट के ठाकुर द्वारा महिलाओं के साथ किए गए दुर्व्यवहार के विरोध में था।

काली बाई (Kali Bai) – ‘साक्षरता की देवी’

  • परिचय: डूंगरपुर जिले के रास्तापाल गाँव की एक भील बालिका।
  • बलिदान: अपने गुरु ‘सेंगाभाई’ को अंग्रेजों से बचाते हुए मात्र 13 वर्ष की आयु में शहीद हो गईं। इन्हें आधुनिक एकलव्य माना जाता है।

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राजस्थान के अन्य महत्वपूर्ण व्यक्तित्व (Other Notable Figures)

व्यक्तित्व का नाममुख्य पहचान / उपाधिप्रमुख तथ्य
माणिक्य लाल वर्मामेवाड़ का गांधी‘पंछीड़ा’ गीत लिखा और ‘मेड़वाड़ प्रजामंडल’ की स्थापना की।
गोकुल भाई भट्टराजस्थान का गांधीहाथल गाँव (सिरोही) के निवासी, सिरोही प्रजामंडल की स्थापना।
भोगीलाल पांड्यावागड़ के गांधीडूंगरपुर में ‘भील सेवा संघ’ की स्थापना की।
दामोदर दास राठीसशस्त्र क्रांति के भामाशाहब्यावर में ‘कृष्णा मिल्स’ की स्थापना और क्रांतिकारियों को आर्थिक सहायता।
हरिभाऊ उपाध्यायदास साहब‘हटूंडी’ (अजमेर) में गांधी आश्रम की स्थापना की।

महत्वपूर्ण तथ्य (Quick Facts for Easy Learning)

  • प्रथम निर्वाचित मुख्यमंत्री: टीकाराम पालीवाल।
  • प्रथम महिला मुख्यमंत्री: वसुंधरा राजे।
  • प्रथम महिला राज्यपाल: प्रतिभा पाटिल।
  • प्रथम विधानसभा अध्यक्ष: नरोत्तम लाल जोशी।
  • राजस्थान के लोकनायक: जय नारायण व्यास।
  • राजस्थान की मरू कोकिला: अल्लाह जिलाई बाई।
  • वागड़ की मीरा: गवरी बाई।

निष्कर्ष (Conclusion)

राजस्थान के इन महान व्यक्तित्वों ने न केवल युद्ध के मैदान में अपनी वीरता दिखाई, बल्कि जेल की कोठरियों में यातनाएं सहकर और राजनीति के माध्यम से समाज सुधार कर प्रदेश को एक नई दिशा दी। आज का विकसित राजस्थान इन्हीं महापुरुषों के त्याग और संघर्ष का परिणाम है। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों और राजस्थान के इतिहास में रुचि रखने वाले पाठकों के लिए इन तथ्यों का ज्ञान होना अनिवार्य है।

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