A wide-angle landscape illustration of a large concrete dam in arid Rajasthan, India, at sunset, showing a blue water reservoir and distant fort silhouette.

राजस्थान के प्रमुख बाँध: नदी, परियोजना, जिले व राष्ट्रीय उद्यान सहित सम्पूर्ण अध्ययन

Introduction

जब हम ‘राजस्थान’ शब्द सुनते हैं, तो हमारे दिमाग में सबसे पहले क्या आता है? दूर तक फैला रेगिस्तान, तपती गर्मी, ऊंट और किले। है न?

लेकिन, अगर मैं आपसे कहूँ कि रेतीले राजस्थान में पानी का ऐसा अथाह भंडार है जो आपको गोवा या केरल की याद दिला दे, तो क्या आप यकीन करेंगे? जी हाँ, दोस्तों! राजस्थान सिर्फ रेत का समंदर नहीं है, बल्कि यहाँ कुछ ऐसे शानदार बांध (Dams) हैं जो न केवल इस प्यासी धरती की प्यास बुझाते हैं, बल्कि अपनी खूबसूरती से किसी का भी मन मोह लेते हैं।

करंट अफेयर्स अपडेट (ERCP And New Projects)

1. नवनेरा (नौनेरा) बैराज (Navneera Barrage) – कोटा

यह नाम अभी सबसे ज्यादा चर्चा में है। इसे रट लें!

  • क्यों खास है: यह ERCP (पूर्वी राजस्थान नहर परियोजना) का एक बहुत महत्वपूर्ण हिस्सा है।
  • लोकेशन: दीगोद तहसील, कोटा।
  • नदी: कालीसिंध नदी।
  • एग्जाम अपडेट: इसका काम लगभग पूरा हो चुका है और यह सवाई माधोपुर, टोंक और जयपुर तक पानी पहुँचाने में मदद करेगा।

2. ईसरदा बांध परियोजना (Isarda Dam Project)

  • अपडेट: इस बांध से जयपुर और टोंक जिलों के सैकड़ों गांवों को पीने का पानी मिलेगा। यह ‘जल जीवन मिशन’ के तहत बहुत बड़ा मुद्दा है।
  • नदी: बनास।

3. ERCP (Eastern Rajasthan Canal Project)

राजस्थान की “भागीरथी” बनने वाली यह परियोजना 13 जिलों की प्यास बुझाएगी। इसमें कुन्नू, कुल, पार्वती और कालीसिंध नदियों के पानी को बनास, मोरेल और बाणगंगा में डाला जाएगा।

“देसी ट्रिक्स” – बांध याद रखने का आसान तरीका (Memory Mnemonics)

बहुत सारे स्टूडेंट कन्फ्यूज हो जाते हैं कि कौन सा बांध किस जिले में है। यहाँ कुछ मजेदार ट्रिक्स हैं:

Trick 1: झालावाड़ के बांध (Jhalawar Dams)

ट्रिक: “झालावाड़ के भीम ने छाती पर गागर रखी।”

  • भीम = भीमसागर बांध
  • छाती = छापी बांध
  • गागर = गागरिन बांध
  • (याद रखें: झालावाड़ में बहुत बारिश होती है, इसलिए गागर भर गई!)

Trick 2: सवाई माधोपुर के बांध

ट्रिक: “माधव ने ईश्वर (ईसरदा) से मोर (मोरेल) मांगा।”

  • माधव = सवाई माधोपुर
  • ईश्वर = ईसरदा बांध
  • मोर = मोरेल बांध

Trick 3: बांकली बांध (जालोर)

ट्रिक: “जालोर में बांका (टेढ़ा) आदमी सूखा (सुकड़ी नदी) रह गया।”

  • बांका = बांकली बांध
  • सूखा = सुकड़ी नदी
  • ज़िला = जालोर
राजस्थान के प्रमुख बांध

🏞️ 1. भाखड़ा नांगल बाँध (Bhakra Nangal Dam)

  • नदी – सतलुज
  • स्थान – पंजाब–हिमाचल सीमा
  • राजस्थान को लाभ – श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़

🔸 विशेषताएँ

  • यह भारत के सबसे बड़े बहुउद्देशीय बाँधों में से एक है
  • इससे राजस्थान नहर प्रणाली को पानी मिलता है

🔸 महत्व

  • सिंचाई
  • जल विद्युत उत्पादन
  • उत्तर-पश्चिमी राजस्थान में हरित क्रांति का आधार

🏞️ 2. राणा प्रताप सागर बाँध

  • नदी – चंबल
  • जिला – चित्तौड़गढ़
  • निर्माण वर्ष – 1970

🔸 विशेषताएँ

  • चंबल घाटी परियोजना का हिस्सा
  • यहाँ से बिजली उत्पादन भी होता है

🔸 महत्व

  • सिंचाई + विद्युत उत्पादन
  • दक्षिणी राजस्थान के लिए अत्यंत उपयोगी

🏞️ 3. गांधी सागर बाँध

  • नदी – चंबल
  • स्थान – मध्यप्रदेश–राजस्थान सीमा
  • निर्माण वर्ष – 1960

🔸 विशेषताएँ

  • राजस्थान का पहला चंबल परियोजना बाँध
  • विशाल जल संग्रह क्षमता

🔸 महत्व

  • सिंचाई
  • बिजली उत्पादन
  • बाढ़ नियंत्रण

🏞️ 4. जवाहर सागर बाँध

  • नदी – चंबल
  • जिला – कोटा

🔸 विशेषताएँ

  • यह एक विद्युत परियोजना बाँध है
  • कोटा क्षेत्र की बिजली आवश्यकता पूरी करता है

🔸 महत्व

  • हाइड्रो पावर
  • औद्योगिक विकास में सहायक

🏞️ 5. बीसलपुर बाँध (Bisalpur Dam)

  • नदी – बनास
  • जिला – टोंक
  • निर्माण वर्ष – 1999

🔸 विशेषताएँ

  • जयपुर, अजमेर, टोंक के लिए जीवनरेखा
  • पीने के पानी का सबसे बड़ा स्रोत

🔸 महत्व

  • शहरी जल आपूर्ति
  • सूखे समय में सबसे भरोसेमंद बाँध

🏞️ 6. माही बजाज सागर बाँध

  • नदी – माही
  • जिला – बांसवाड़ा
  • निर्माण वर्ष – 1983

🔸 विशेषताएँ

  • आदिवासी क्षेत्र में स्थित
  • जल विद्युत परियोजना

🔸 महत्व

  • बिजली उत्पादन
  • स्थानीय सिंचाई सुविधा

🏞️ 7. जाखम बाँध

  • नदी – जाखम
  • जिला – प्रतापगढ़

🔸 विशेषताएँ

  • दक्षिणी राजस्थान का महत्वपूर्ण बाँध
  • कम वर्षा वाले क्षेत्र के लिए उपयोगी

🔸 महत्व

  • सिंचाई
  • ग्रामीण जल आपूर्ति

🏞️ 8. सोम कागदर बाँध

  • नदी – सोम
  • जिला – डूंगरपुर

🔸 विशेषताएँ

  • जनजातीय बहुल क्षेत्र
  • कृषि आधारित अर्थव्यवस्था को सहारा

🔸 महत्व

  • सिंचाई
  • जल संरक्षण

9. कालीसिंध बाँध

  • नदी – कालीसिंध
  • जिला – झालावाड़
  • नदी तंत्र – चंबल नदी प्रणाली
  • निर्माण उद्देश्य – सिंचाई एवं जल संरक्षण

कालीसिंध बाँध दक्षिण-पूर्वी राजस्थान की कृषि व्यवस्था के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।
यह क्षेत्र अपेक्षाकृत अधिक वर्षा वाला है, फिर भी वर्षा जल को संरक्षित कर उपयोग में लाने के लिए इस बाँध की भूमिका अहम हो जाती है।

  • कालीसिंध नदी → चंबल की सहायक नदी
  • यह क्षेत्र सोयाबीन और गेहूँ की खेती के लिए जाना जाता है
  • झालावाड़ को राजस्थान का हरा-भरा जिला भी कहा जाता है

10. पार्वती बाँध

  • नदी – पार्वती
  • जिला – बारां
  • नदी तंत्र – चंबल प्रणाली

पार्वती बाँध बारां जिले की कृषि अर्थव्यवस्था की रीढ़ माना जाता है।
यह बाँध खरीफ और रबी दोनों मौसमों में सिंचाई सुविधा देता है, जिससे किसान केवल मानसून पर निर्भर नहीं रहते।

  • बारां जिला → राजस्थान का सर्वाधिक वर्षा वाला जिला
  • पार्वती नदी → चंबल की सहायक
  • यह क्षेत्र धान और गेहूँ की खेती के लिए प्रसिद्ध है

11. बाणगंगा बाँध

  • नदी – बाणगंगा
  • क्षेत्र – जयपुर / दौसा

बाणगंगा नदी प्राचीन काल से ही जल प्रबंधन के लिए जानी जाती रही है।
इस नदी पर बने बाँध स्थानीय सिंचाई और पारंपरिक जल संरक्षण का उदाहरण हैं।

  • बाणगंगा नदी का उद्गम → अरावली पर्वतमाला
  • यह नदी अंततः यमुना नदी प्रणाली से जुड़ती है
  • प्राचीन राजपूत काल में इस क्षेत्र में जल संरचनाओं का विकास हुआ

12. मोरेल बाँध

  • नदी – मोरेल
  • जिला – सवाई माधोपुर

मोरेल बाँध का महत्व केवल खेती तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पर्यावरण और वन्यजीव संरक्षण से भी जुड़ा हुआ है।
यह क्षेत्र रणथंभौर के पास होने के कारण पारिस्थितिक दृष्टि से संवेदनशील माना जाता है।

  • निकटवर्ती राष्ट्रीय उद्यान – रणथंभौर राष्ट्रीय उद्यान
  • मोरेल नदी → बनास नदी की सहायक
  • जल स्रोत वन्यजीवों के लिए जीवन रेखा होते हैं

13. साबरमती नदी पर बने बाँध (राजस्थान क्षेत्र)

  • नदी – साबरमती
  • क्षेत्र – उदयपुर संभाग

साबरमती नदी का उद्गम राजस्थान में होता है, यह तथ्य अक्सर परीक्षाओं में पूछा जाता है।
इस नदी पर बने बाँध आदिवासी क्षेत्रों में सिंचाई और जल आपूर्ति के लिए उपयोगी हैं।

  • साबरमती नदी का उद्गम → अरावली पर्वतमाला
  • यह नदी गुजरात से होकर अरब सागर में मिलती है

14. लूनी नदी पर बने बाँध

  • नदी – लूनी
  • जिले – जोधपुर, पाली, बाड़मेर

लूनी नदी राजस्थान की सबसे विशिष्ट नदी है क्योंकि इसका पानी आगे चलकर खारा हो जाता है।
इस नदी पर बने बाँध मुख्य रूप से वर्षा जल संरक्षण और भूजल रिचार्ज के लिए बनाए गए हैं।

  • लूनी नदी अरब सागर तक नहीं पहुँचती
  • यह नदी कच्छ के रण की ओर समाप्त होती है
  • मरुस्थलीय जल प्रबंधन का महत्वपूर्ण उदाहरण

15. नवलखा बाँध

  • नदी – स्थानीय जलधारा
  • जिला – बूंदी

नवलखा बाँध ऐतिहासिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है और हाड़ौती क्षेत्र की जल संरचनाओं में गिना जाता है।
बूंदी को वैसे भी राजस्थान का झीलों और बावड़ियों का शहर कहा जाता है।

  • बूंदी → हाड़ौती क्षेत्र का हिस्सा
  • पारंपरिक जल संरचनाएँ (बावड़ी, तालाब) यहाँ विशेष रूप से पाई जाती हैं
  • स्थापत्य और जल प्रबंधन का संयोजन

16. सादड़ी बाँध

  • नदी – स्थानीय
  • जिला – पाली

सादड़ी बाँध अरावली क्षेत्र में स्थित है और वर्षा जल को रोकने में सहायक है।
पाली जिले में पशुपालन और खेती दोनों के लिए यह बाँध उपयोगी माना जाता है।

  • पाली जिला → अरावली पर्वतमाला से प्रभावित
  • लघु सिंचाई परियोजनाओं का अच्छा उदाहरण
  • ग्रामीण अर्थव्यवस्था से सीधा संबंध

17. गजनेर बाँध

  • नदी / जलधारा – स्थानीय जल स्रोत
  • जिला – बीकानेर
  • क्षेत्र – मरुस्थलीय (थार क्षेत्र)

गजनेर बाँध बीकानेर जैसे अत्यंत शुष्क इलाके में पानी का एक भरोसेमंद स्रोत है।
यह बाँध खास तौर पर पशुपालन आधारित अर्थव्यवस्था के लिए उपयोगी रहा है, क्योंकि इस क्षेत्र में खेती सीमित है।

  • बीकानेर → थार मरुस्थल का हिस्सा
  • यहाँ वर्षा बहुत कम होती है
  • गजनेर क्षेत्र गजनेर वन्यजीव अभयारण्य के लिए भी जाना जाता है

18. कायलाना बाँध

  • नदी / स्रोत – कायलाना झील
  • जिला – जोधपुर

कायलाना बाँध जोधपुर शहर की मुख्य पेयजल आपूर्ति का पारंपरिक और महत्वपूर्ण स्रोत रहा है।
रेगिस्तानी क्षेत्र में स्थित होने के कारण इसका महत्व केवल प्रशासनिक नहीं, बल्कि जीवन से जुड़ा हुआ है।

  • जोधपुर → मरुस्थलीय जल संकट से प्रभावित जिला
  • कायलाना झील का निर्माण प्रतिहार काल से जुड़ा माना जाता है

19. रामगढ़ बाँध

  • नदी – बाणगंगा
  • जिला – जयपुर

रामगढ़ बाँध कभी जयपुर शहर की प्रमुख जल आपूर्ति परियोजना हुआ करता था।
आज यह बाँध प्रशासनिक लापरवाही और जल प्रबंधन की चुनौतियों का उदाहरण भी माना जाता है।

  • बाणगंगा नदी → अरावली से निकलती है
  • रामगढ़ बाँध को कभी जयपुर की जीवनरेखा कहा जाता था

20. पिचोला झील बाँध

  • नदी / जलधारा – स्थानीय
  • जिला – उदयपुर

पिचोला झील पर स्थित बाँध उदयपुर की झील प्रणाली का आधार है।
यह बाँध केवल जल संग्रह नहीं करता, बल्कि पर्यटन, पर्यावरण और शहरी जीवन को एक साथ जोड़ता है।

  • उदयपुर → झीलों का शहर
  • पिचोला झील का निर्माण महाराणा लाखा के समय से जुड़ा माना जाता है
  • पर्यटन आधारित जल संरचना का उदाहरण

21. फतेह सागर बाँध

  • नदी / स्रोत – स्थानीय जलधारा
  • जिला – उदयपुर

फतेह सागर बाँध उदयपुर की आधुनिक जल व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
यह बाँध शहर के भूजल स्तर को बनाए रखने और अतिरिक्त जल संग्रह में सहायक है।

  • फतेह सागर झील → पिचोला झील प्रणाली से जुड़ी
  • आसपास का क्षेत्र अरावली पर्वतमाला से प्रभावित

22. आनंद सागर बाँध

  • नदी – स्थानीय
  • जिला – बांसवाड़ा

आदिवासी बहुल बांसवाड़ा जिले में स्थित आनंद सागर बाँध खेती और स्थानीय जीवन को स्थिरता देता है।
यह बाँध दर्शाता है कि लघु और मध्यम परियोजनाएँ भी क्षेत्रीय विकास में बड़ी भूमिका निभा सकती हैं।

  • बांसवाड़ा → जनजातीय बहुल जिला
  • माही नदी तंत्र से प्रभावित क्षेत्र
  • आदिवासी क्षेत्र विकास योजनाओं से जुड़ा हुआ

23. नाहर सागर बाँध

  • नदी / जलधारा – स्थानीय
  • जिला – अलवर

नाहर सागर बाँध अलवर जिले के ग्रामीण क्षेत्रों के लिए जल उपलब्धता सुनिश्चित करता है।

Mind Map: राजस्थान के प्रमुख बाँध

नदी आधारित प्रमुख बाँध

नदी आधारित बाँध

├── सतलुज नदी
│ └── भाखड़ा नांगल → श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़

├── बनास नदी
│ └── बीसलपुर → जयपुर, अजमेर, टोंक (पेयजल)

├── माही नदी
│ └── माही बजाज सागर → बांसवाड़ा (आदिवासी क्षेत्र)

├── सोम नदी
│ └── सोम कागदर → डूंगरपुर

├── जाखम नदी
│ └── जाखम बाँध → प्रतापगढ़

└── लूनी नदी
└── मरुस्थलीय जल संरक्षण (पाली, जोधपुर, बाड़मेर)

चंबल घाटी परियोजना

चंबल घाटी परियोजना

├── गांधी सागर बाँध
│ ├── पहला बाँध
│ ├── राजस्थान–MP सीमा

├── राणा प्रताप सागर
│ ├── चित्तौड़गढ़
│ ├── सिंचाई + बिजली

├── जवाहर सागर
│ ├── कोटा
│ ├── जल विद्युत उत्पादन

├── कालीसिंध बाँध
│ └── झालावाड़

└── पार्वती बाँध
└── बारां (सर्वाधिक वर्षा वाला जिला)

पेयजल आपूर्ति से जुड़े बाँध

पेयजल बाँध

├── बीसलपुर बाँध
│ ├── जयपुर
│ ├── अजमेर
│ └── टोंक

├── कायलाना बाँध
│ └── जोधपुर

├── रामगढ़ बाँध
│ └── जयपुर (पुराना जल स्रोत)

└── सिलीसेढ़ बाँध
└── अलवर

पर्यटन + पर्यावरण से जुड़े बाँध

पर्यटन / पर्यावरण

├── पिचोला झील बाँध
│ └── उदयपुर

├── फतेह सागर बाँध
│ └── उदयपुर

├── मोरेल बाँध
│ └── रणथंभौर राष्ट्रीय उद्यान

├── नाहर सागर बाँध
│ └── सरिस्का टाइगर रिज़र्व

└── सिलीसेढ़ बाँध
└── सरिस्का क्षेत्र

निष्कर्ष

राजस्थान के प्रमुख बाँध यह स्पष्ट करते हैं कि कम वर्षा और मरुस्थलीय परिस्थितियों के बावजूद राज्य ने जल प्रबंधन को अपनी ताकत बनाया है। ये बाँध केवल पानी रोकने की संरचनाएँ नहीं हैं, बल्कि कृषि, पेयजल, बिजली उत्पादन, पशुपालन, पर्यावरण संरक्षण और पर्यटन—सभी क्षेत्रों का आधार हैं।

चंबल घाटी परियोजना जैसे बड़े बाँध जहाँ ऊर्जा और सिंचाई को मजबूती देते हैं, वहीं बीसलपुर, कायलाना और रामगढ़ जैसे बाँध शहरी जीवन की प्यास बुझाते हैं। दूसरी ओर, माही बजाज सागर, सोम कागदर और आनंद सागर जैसे बाँध आदिवासी क्षेत्रों में संतुलित विकास की मिसाल हैं। गजनेर, लूनी और मरुस्थलीय क्षेत्रों के बाँध यह दिखाते हैं कि सीमित संसाधनों में भी प्रभावी जल संरक्षण संभव है

परीक्षा की दृष्टि से देखें तो राजस्थान के बाँधों से जुड़े प्रश्न नदी तंत्र, राष्ट्रीय उद्यान, जिले, परियोजनाएँ और उपयोगिता—इन सभी कोणों से पूछे जाते हैं। इसलिए इनका अध्ययन केवल तथ्य याद करने तक सीमित न रहकर, उनके भौगोलिक, आर्थिक और पर्यावरणीय महत्व को समझते हुए करना चाहिए।

अंततः, राजस्थान के बाँध राज्य की जल-सुरक्षा, खाद्य-सुरक्षा और सतत विकास की रीढ़ हैं—और भविष्य में भी रहेंगे।

1 thought on “राजस्थान के प्रमुख बाँध: नदी, परियोजना, जिले व राष्ट्रीय उद्यान सहित सम्पूर्ण अध्ययन”

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