Rajput Age of Rajasthan (Gurjara-Pratihara, Chauhan, Guhil, Paramara) – Exam-Oriented Notes

Introduction

Rajput Age in Rajasthan

Rajasthan का असली गौरव तब शुरू होता है जब Rajput dynasties का उदय होता है। 7वीं से 12वीं शताब्दी के बीच राजस्थान कई शक्तिशाली राजवंशों का केंद्र बना—जिन्होंने न केवल राजनीति बल्कि संस्कृति, कला, युद्धनीति और प्रशासन में भी अपनी छाप छोड़ी।
इस period को Rajasthan का Golden Chapter माना जाता है, क्योंकि यहीं से साहस, वीरता और स्वाभिमान की Rajput identity विकसित हुई।

1. Gurjara-Pratihara Dynasty (गुर्जर-प्रतिहार वंश)

⭐ Origin

गुर्जर-प्रतिहारों का उदय 6वीं–7वीं शताब्दी में हुआ।
इस वंश को “Pratihara” इसलिए कहा गया क्योंकि इनके पूर्वज Lakshmana ने राम की रक्षा में “doorkeeper (प्रत्यार)” का कार्य किया था।

⭐ Important Rulers

🔹 Nagabhata I (730–756 CE)

  • Rajasthan में इस वंश का वास्तविक विस्तार इसी राजा से शुरू होता है।
  • नागभट्ट ने Arabs के आक्रमण को रोका – This is a very important exam point.
  • प्रारंभिक राजधानी: Jalore region

🔹 Nagabhata II (793–833 CE)

  • इसने Kannauj (कन्नौज) पर अधिकार किया।
  • इस समय Gurjara-Pratihara North India की सबसे powerful शक्ति बन गए थे।

🔹 Mihira Bhoja (836–885 CE)

  • इन्हें Bhoja the Great कहा जाता है।
  • Title: Adivaraha
  • इसके शासनकाल में Rajasthan में stability और economic growth दिखाई देती है।

🔖 Exam Fact Box – Gurjara-Pratihara

  • राजधानी: प्रारंभ में जालोर, बाद में कन्नौज
  • Mihira Bhoja – सबसे प्रसिद्ध शासक
  • अरबों के आक्रमण को रोका – Rajasthan history में महत्वपूर्ण घटना

2. Chauhan Dynasty (चौहान वंश)

Chauhans का इतिहास Rajasthan से बहुत गहराई से जुड़ा है। इन्हें warrior clan माना जाता है और कई राज्यों का शासन इन्होंने किया।

⭐ Early Chauhans

इनका प्रारंभिक केंद्र Ajmer और Sambhar था।
चौहानों को Agnivanshi राजपूत माना जाता है।

🔹 Ajayraj Chauhan

  • अजमेर शहर (अजयमेरु) की स्थापना का श्रेय इन्हें दिया जाता है।

🔹 Vigraharaj IV (Bisaldev)

  • इन्होंने शिक्षा, साहित्य और प्रशासन को बढ़ावा दिया।
  • प्रसिद्ध Bisal Deo’s inscription मिलता है।

🔹 Prithviraj Chauhan (1177–1192 CE)

  • Rajasthan ही नहीं बल्कि Indian history के सबसे प्रसिद्ध योद्धा।
  • तराइन के युद्ध (1191 और 1192) उनके समय हुए।
  • Ajmer और Delhi इनके प्रमुख केंद्र थे।

🔖 Exam Fact Box – Chauhan Dynasty

  • अजयमेरु (Ajmer) की स्थापना – अजयराज चौहान
  • सबसे प्रमुख शासक – पृथ्वीराज चौहान
  • प्रारंभिक राजधानी – सांभर

3. Guhil / Guhila Dynasty (गुहिल वंश – मेवाड़ के शासक)

Guhil वंश राजस्थान के सबसे पुराने राजवंशों में से एक है।
इनका शासन क्षेत्र बाद में Mewar कहलाया।

⭐ Important Rulers

🔹 Bappa Rawal (8th century)

  • इन्हें Mewar का वास्तविक संस्थापक माना जाता है।
  • अरबी आक्रमणों का सामना करने वालों में प्रमुख।

🔹 Khuman II

  • Mewar को मजबूत करने में महत्वपूर्ण योगदान।

🔹 Rana Kumbha (1433–1468 CE)

  • हालाँकि ये बाद का काल है, पर इनके योगदान के कारण परीक्षा में पूछा जाता है।
  • कुम्भलगढ़ किले का निर्माण — UNESCO site today

🔹 Maharana Pratap

  • Mewar का गौरव, हल्दीघाटी युद्ध (1576) का नायक।

🔖 Exam Fact Box – Guhil Dynasty

  • संस्थापक: बप्पा रावल
  • क्षेत्र: मेवाड़
  • प्रसिद्ध शासक – महाराणा प्रताप

4. Paramara Dynasty (परमार वंश)

Paramaras का Rajasthan में खासकर Jalore और आसपास के क्षेत्रों में influence रहा।

⭐ Important Points

  • यह Agnivanshi Rajput clan था।
  • प्रारंभिक राजधानी: Arbuda (Mount Abu)
  • बाद में Jalore, Bhinmal पर भी इनका अधिकार रहा।

🔹 Bhoja Paramara

हालाँकि ये मुख्य रूप से Malwa region के शासक थे,
लेकिन इनके समय में राजस्थान के कई हिस्सों पर Paramara influence बढ़ा था।

यह भी पढ़ें – Delhi Sultanate and Mughal–Rajasthan Relations


🔖 Exam Fact Box – Paramara Dynasty

  • Origin: Mount Abu
  • Agnivanshi राजपूत
  • प्रमुख केंद्र: जालोर, भीनमाल

⭐ राजनीतिक संरचना

Paramaras छोटे-छोटे feudatory states के रूप में उभरे और बाद में स्वतंत्र शासन स्थापित किया।
इनके शासनकाल में प्रशासन काफी संगठित था — गाँव, विशय और मंडलों के रूप में व्यवस्था चलती थी।
राजस्व वसूली, कृषि व्यवस्था और व्यापारिक कर इनके शासन में सुव्यवस्थित थे।

सांस्कृतिक योगदान

परमार वंश कला और साहित्य के बहुत बड़े संरक्षक माने जाते हैं।
विशेषकर Bhoja Paramara (मालवा शासक) को विद्या और साहित्य का प्रतीक माना जाता है।
उनके समय में राजस्थान के विद्वानों को संरक्षण मिला, जिससे शिक्षा और संस्कृति का विकास हुआ।
राजस्थान के Jalore और Bhinmal जैसे क्षेत्रों में Sanskrit scholars के रहन-सहन के प्रमाण मिलते हैं।

⭐ वास्तुकला (Architecture)

परमार शैली की इमारतें बहुत सरल और कलात्मक मानी जाती हैं।
Mount Abu और Jalore क्षेत्र के मंदिरों में परमार वास्तुकला के अवशेष आज भी मिलते हैं।
इनमें जटिल नक्काशी, पत्थर की कलाकृति और मंदिरों के शिखरों पर विशेष डिजाइन देखे जाते हैं।

⭐ संघर्ष और विस्तार

परमारों का संघर्ष मुख्यतः Solanki, Chauhan और Gujarat rulers के साथ होता रहा।
Jalore के Parmara rulers ने कई बार Chauhans से टक्कर लेकर अपना क्षेत्र बचाया।
सबसे प्रसिद्ध शासक Kanhad Dev Parmar माना जाता है, जिसने Alauddin Khilji के आक्रमण के समय वीरतापूर्वक मुकाबला किया।

Conclusion

Rajput Age ने Rajasthan के इतिहास को shape किया —
यहाँ की वीरता, युद्ध कला, architecture (forts, palaces), संस्कृति और परंपराएँ
इन्हीं राजवंशों की देन हैं।

हर competitive exam में Rajput dynasties से 2–3 questions ज़रूर पूछे जाते हैं।
इसलिए यह topic high scoring माना जाता है।

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