A scenic landscape of the Aravalli mountain range in Rajasthan featuring rugged peaks, flat-topped plateaus, and dry valley vegetation under a sunset sky.

राजस्थान के अरावली पर्वतमाला, प्रमुख शिखर, जरगा पहाड़ी, भाकर क्षेत्र, पठार व अन्य महत्वपूर्ण पहाड़ियों पर आधारित सटीक exam-oriented notes व MCQ।

राजस्थान केवल रेत के टीलों (sand dunes) और किलों (forts) की भूमि नहीं है, बल्कि यह दुनिया की सबसे पुरानी पर्वत श्रृंखला (world’s oldest mountain range) का घर है: अरावली. यह पर्वतमाला और इसके सहयोगी पठार (plateaus) राज्य की जलवायु, इतिहास और भूगोल की रीढ़ हैं. इस ब्लॉग पोस्ट में, हम इन्हीं अद्वितीय भू-आकृतियों (unique landforms) को गहराई से जानेंगे.

अरावली: राजस्थान की रीढ़ (Aravalli: The Spine of Rajasthan)

अरावली पर्वतमाला लगभग 2.5 अरब साल पुरानी है, जो इसे हिमालय से भी प्राचीन बनाती है. यह गुजरात से दिल्ली तक लगभग 670 किमी. तक फैली हुई है, जिसमें इसका अधिकांश भाग राजस्थान से होकर गुजरता है.

स्थिति: अरावली पर्वतमाला भारत के उत्तर-पश्चिमी भाग में फैली है। यह गुजरात के पालीताणा/माउंट आबू क्षेत्र से शुरू होकर राजस्थान, हरियाणा और दिल्ली तक जाती है।

महत्व (Significance):

जलवायु विभाजक (Climatic Divider): यह पर्वतमाला राज्य को दो प्रमुख भागों में बांटती है: उत्तर-पश्चिम का रेतीला भाग (Thar Desert) और दक्षिण-पूर्व का अधिक उपजाऊ (fertile) भाग.

•मरुस्थल का अवरोध (Desert Barrier): यह थार मरुस्थल को पूर्व की ओर फैलने से रोकती है.

•जल स्रोत (Water Source): बनास (Banas), लूनी (Luni), और साबरमती (Sabarmati) जैसी महत्वपूर्ण नदियाँ इसी श्रेणी से निकलती हैं.

प्रमुख पर्वत शिखर (Major Mountain Peaks)

अरावली पर्वतमाला सिर्फ चट्टानों की श्रृंखला नहीं है, बल्कि भारत के भूगोल, इतिहास और पर्यावरण की एक जीवित कहानी है। करोड़ों वर्षों से खड़ी यह पर्वतमाला आज भी राजस्थान और आसपास के क्षेत्रों की जलवायु, संस्कृति और जीवनशैली को प्रभावित करती है। आइए अरावली के प्रमुख पर्वत शिखरों के बारे में विस्तार से जानते हैं।

1. गुरु शिखर (Guru Shikhar)

  • ऊँचाई: 1,722 मीटर
  • जिला: सिरोही, राजस्थान
  • स्थिति: माउंट आबू
  • विशेषता:
    • अरावली का सबसे ऊँचा शिखर
    • दत्तात्रेय (गुरु) मंदिर स्थित
    • राजस्थान का भी सर्वोच्च बिंदु

2. सेर पहाड़ी (Ser Peak)

  • ऊँचाई: लगभग 1,597 मीटर
  • जिला: उदयपुर (दक्षिणी अरावली)
  • विशेषता:
    • अरावली का दूसरा सबसे ऊँचा शिखर
    • प्राचीन आग्नेय एवं कायांतरित चट्टानों से निर्मित

3. अचलगढ़ शिखर (Achalgarh Peak)

  • ऊँचाई: लगभग 1,380 मीटर
  • जिला: सिरोही
  • विशेषता:
    • अचलगढ़ किला एवं अचलेश्वर महादेव मंदिर
    • पर्यटन व धार्मिक महत्व

4. जरगा पहाड़ी (Jarga Hill)

  • ऊँचाई: लगभग 1,431 मीटर
  • जिला: उदयपुर
  • विशेषता:
  • जरगा क्षेत्र के आसपास से कई स्थानीय जलधाराएँ निकलती हैं
  • यह क्षेत्र बेडच एवं सोम नदी तंत्र के जल संग्रहण क्षेत्र के रूप में कार्य करता है
  • वर्षा जल संचयन और भूजल पुनर्भरण में इसकी भूमिका महत्वपूर्ण है

5. देलवाड़ा / दिलवाड़ा क्षेत्र की पहाड़ियाँ

  • ऊँचाई: 1,200–1,300 मीटर
  • जिला: सिरोही
  • विशेषता:
    • प्रसिद्ध दिलवाड़ा जैन मंदिर
    • संगमरमर की खदानें

6. तोड़गढ़ शिखर समूह

  • ऊँचाई: 900–1,100 मीटर
  • जिले: पाली, राजसमंद, टोंक
  • विशेषता:
    • तोड़गढ़–रावली वन्यजीव अभयारण्य
    • तेंदुआ, भालू, सियार पाए जाते हैं

7. कुम्भलगढ़ क्षेत्र की पहाड़ियाँ

  • ऊँचाई: लगभग 1,100 मीटर
  • जिला: राजसमंद
  • विशेषता:
    • कुम्भलगढ़ दुर्ग (UNESCO World Heritage Site)
    • अरावली का रणनीतिक व ऐतिहासिक क्षेत्र

8. माउंट आबू पठारी शिखर

  • ऊँचाई: 1,200–1,300 मीटर
  • जिला: सिरोही
  • विशेषता:
    • अरावली का एकमात्र हिल स्टेशन
    • सबसे अधिक वर्षा वाला क्षेत्र

9. अलवर–जयपुर क्षेत्र की अरावली पहाड़ियाँ

  • ऊँचाई: 500–900 मीटर
  • जिले: अलवर, जयपुर
  • विशेषता:
    • सरिस्का टाइगर रिज़र्व
    • क्वार्ट्जाइट चट्टानों की प्रधानता

10. मंगर बानी पहाड़ियाँ

  • ऊँचाई: 300–600 मीटर
  • जिला: गुरुग्राम (हरियाणा)
  • विशेषता:
    • दिल्ली-NCR का सबसे प्राचीन वन क्षेत्र
    • जैव विविधता हॉटस्पॉट

11. भट्टी–असौला पहाड़ियाँ

  • ऊँचाई: 300–400 मीटर
  • क्षेत्र: दक्षिण दिल्ली
  • विशेषता:
    • अरावली का उत्तरी विस्तार
    • वायु प्रदूषण नियंत्रण में सहायक

12. रेवाड़ी–महेंद्रगढ़ क्षेत्र की पहाड़ियाँ

  • ऊँचाई: 350–500 मीटर
  • जिला: महेंद्रगढ़ (हरियाणा)
  • विशेषता:
    • अरावली का सबसे उत्तरी भाग
    • शुष्क एवं अपक्षयित स्थलरूप

3 प्रमुख भाकर क्षेत्र

भाकर कोई एक पहाड़ी नहीं, बल्कि अरावली की स्थानीय पहाड़ी श्रेणियाँ हैं।

1️⃣ जालोर भाकर

  • स्थान: जालोर जिला
  • पर्वतमाला: अरावली
  • औसत ऊँचाई: लगभग 300–500 मीटर
  • विशेषताएँ:
    • शुष्क, पथरीला क्षेत्र
    • कृषि सीमित
    • वर्षा जल शीघ्र बह जाता है
  • उप-भाकर:
    • रोजा भाकर
    • इसराना भाकर
    • झारोला भाकर

👉 जालोर भाकर दक्षिण-पश्चिम अरावली का प्रमुख भाग है।

2️⃣ सिरोही भाकर

  • स्थान: सिरोही जिला
  • औसत ऊँचाई: लगभग 400–600 मीटर
  • विशेषताएँ:
    • अरावली का अपेक्षाकृत ऊँचा भाकर क्षेत्र
    • माउंट आबू क्षेत्र से निकटता
    • खनिज (संगमरमर, वोलास्टोनाइट)

👉 सिरोही भाकर अरावली के दक्षिणी भाग का ऊँचा पहाड़ी क्षेत्र है।

3️⃣ जसवंतपुरा भाकर (जालोर–सिरोही सीमा)

  • स्थान: जालोर–सिरोही सीमा क्षेत्र
  • सर्वोच्च चोटी: डोरा पर्वत
  • ऊँचाई: लगभग 869 मीटर
  • विशेषताएँ:
    • भाकर क्षेत्रों में सबसे ऊँचा भाग
    • वन क्षेत्र अपेक्षाकृत अधिक

जसवंतपुरा भाकर भाकर क्षेत्रों का सर्वाधिक ऊँचा भाग है।

भाकर से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्य (Very Important)

  • भाकर पठार नहीं हैं
  • भाकर = अरावली की अपक्षयित पहाड़ियाँ
  • भाकर क्षेत्र में
    • तीव्र ढाल
    • उथली मिट्टी
    • जल संरक्षण की समस्या
  • प्रमुख जिले: जालोर, सिरोही

राजस्थान के प्रमुख पठार (Major Plateaus of Rajasthan)

राजस्थान में पठार मुख्यतः दक्षिण-पूर्वी और दक्षिणी भाग में पाए जाते हैं। ये पठार अरावली पर्वतमाला और विंध्यन प्रणाली से जुड़े हुए हैं तथा राज्य के नदी तंत्र, कृषि और खनिज पर गहरा प्रभाव डालते हैं।

1. मेवाड़ पठार (Mewar Plateau)

  • स्थिति: दक्षिणी राजस्थान
  • जिले: उदयपुर, राजसमंद, चित्तौड़गढ़, भीलवाड़ा
  • औसत ऊँचाई: लगभग 500–800 मीटर
  • भू-रचना: अरावली की प्राचीन कायांतरित चट्टानें
  • नदियाँ:
    • बनास
    • बेड़च
    • माही (दक्षिणी किनारे से)

विशेषताएँ

  • यह अरावली और मालवा पठार के बीच संक्रमण क्षेत्र है
  • यहाँ भूमि अपेक्षाकृत उपजाऊ है
  • ऐतिहासिक रूप से मेवाड़ क्षेत्र का आधार

👉 मेवाड़ पठार दक्षिणी राजस्थान में स्थित है और अरावली से प्रभावित पठारी क्षेत्र है।

2. मालवा पठार (Malwa Plateau – राजस्थान का भाग)

  • स्थिति: दक्षिण-पूर्वी राजस्थान
  • जिले: झालावाड़, कोटा, बारां, झालरापाटन
  • औसत ऊँचाई: लगभग 450–600 मीटर
  • भू-रचना: ज्वालामुखीय बेसाल्ट (Deccan Trap का विस्तार)

नदियाँ

  • चंबल
  • काली सिंध
  • पार्वती

विशेषताएँ

  • राजस्थान का सबसे उपजाऊ पठारी क्षेत्र
  • काली मिट्टी (Black Soil)
  • सोयाबीन, गेहूँ की खेती

3. हाड़ौती पठार (Hadoti Plateau)

  • स्थिति: दक्षिण-पूर्वी राजस्थान
  • जिले: कोटा, बूंदी, बारां, झालावाड़
  • औसत ऊँचाई: लगभग 300–500 मीटर
  • भू-रचना: विंध्यन चट्टानें

नदियाँ

  • चंबल (मुख्य)
  • पार्वती
  • काली सिंध

विशेषताएँ

  • चंबल नदी द्वारा कटा-फटा (Dissected Plateau)
  • जल संसाधनों में समृद्ध
  • कोटा बैराज, गांधी सागर परियोजना
  • हाड़ौती पठार चंबल नदी द्वारा निर्मित अपरदित पठार है।

4. विन्ध्य पठार (Rajasthan part of Vindhya Plateau)

  • स्थिति: दक्षिण-पूर्वी राजस्थान
  • जिले: कोटा, बूंदी, सवाई माधोपुर
  • औसत ऊँचाई: लगभग 400–600 मीटर
  • ढाल: दक्षिण-पूर्व की ओर

विशेषताएँ

  • चंबल घाटी से जुड़ा हुआ
  • बलुआ पत्थर की प्रधानता
  • बीहड़ भूमि का विकास
  • विन्ध्य पठार का राजस्थान भाग चंबल बेसिन से संबंधित है।

5. बीजोलिया पठार (Bijolia Plateau)

  • स्थिति: भीलवाड़ा जिला
  • औसत ऊँचाई: लगभग 600 मीटर
  • भू-रचना: चूना पत्थर प्रधान

विशेषताएँ

  • सीमेंट उद्योग के लिए कच्चा माल
  • बनास नदी के अपवाह क्षेत्र में स्थित
  • सीमित कृषि
  • बीजोलिया पठार चूना पत्थर के लिए प्रसिद्ध है।

6. डांग पठार (Dang Plateau)

  • स्थिति: राजस्थान–मध्य प्रदेश सीमा (झालावाड़ क्षेत्र)
  • औसत ऊँचाई: लगभग 450 मीटर
  • भू-रचना: मालवा पठार का विस्तार

विशेषताएँ

  • वन क्षेत्र अधिक
  • आदिवासी बहुल क्षेत्र
  • कृषि सीमित लेकिन उपजाऊ मिट्टी
  • डांग पठार मालवा पठार का दक्षिणी विस्तार है।
  • सबसे उपजाऊ पठार → मालवा
  • चंबल से कटा पठार → हाड़ौती
  • अरावली से प्रभावित → मेवाड़
  • सीमेंट/चूना पत्थर → बीजोलिया
  • मालवा का विस्तार → डांग

राजस्थान की अन्य महत्वपूर्ण पहाड़ियाँ (Other Important Hills of Rajasthan)

राजस्थान में अरावली पर्वतमाला के अलावा भी कई ऐसी पहाड़ियाँ हैं जो ऐतिहासिक, धार्मिक, भौगोलिक और परीक्षा की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। ये पहाड़ियाँ ऊँचाई में भले ही बहुत अधिक न हों, लेकिन राज्य के स्थानीय भू-आकृतिक स्वरूप को समझने के लिए इनका अध्ययन आवश्यक है।

1. त्रिकूट पहाड़ियाँ (जैसलमेर क्षेत्र)

  • स्थान: जैसलमेर जिला
  • क्षेत्र: पश्चिमी राजस्थान
  • विशेषता:
    • सोनार दुर्ग (जैसलमेर किला) इन्हीं पहाड़ियों पर स्थित है
    • मरुस्थलीय क्षेत्र में पाई जाने वाली दुर्लभ चट्टानी पहाड़ियाँ
  • भू-रचना: बलुआ पत्थर

2. त्रिकूट पहाड़ी (करौली क्षेत्र)

  • स्थान: करौली जिला
  • विशेषता:
    • प्रसिद्ध कैलादेवी मंदिर इसी पहाड़ी क्षेत्र में स्थित है
    • धार्मिक पर्यटन का प्रमुख केंद्र
  • महत्व:
    • पूर्वी राजस्थान की प्रमुख धार्मिक पहाड़ी

3. चिड़िया टूक पहाड़ियाँ (जोधपुर)

  • स्थान: जोधपुर जिला
  • विशेषता:
    • मेहरानगढ़ दुर्ग का पहाड़ी आधार क्षेत्र
    • कठोर चट्टानों से निर्मित
  • भू-आकृति:
    • शुष्क एवं पथरीली पहाड़ियाँ

4. छप्पन पहाड़ियाँ (सिवाणा क्षेत्र, बाड़मेर)

  • स्थान: सिवाणा, बाड़मेर जिला
  • विशेषता:
    • लगभग 56 छोटी पहाड़ियों का समूह
    • पश्चिमी राजस्थान की प्रमुख पहाड़ी श्रृंखला
  • भू-रचना:
    • प्राचीन आग्नेय एवं अवसादी चट्टानें

5. सुंधा पहाड़ी (जालोर)

  • स्थान: जालोर जिला
  • विशेषता:
    • प्रसिद्ध सुंधा माता मंदिर
    • धार्मिक एवं पर्यटन महत्व
  • पर्यावरणीय महत्व:
    • आसपास वन क्षेत्र और जैव विविधता

6. डूंगरी क्षेत्र की पहाड़ियाँ (जयपुर)

  • स्थान: जयपुर जिला
  • प्रमुख उदाहरण:
    • मोती डूंगरी
    • झालाना डूंगरी
  • विशेषता:
    • गणेश मंदिर (मोती डूंगरी)
    • झालाना जैविक उद्यान क्षेत्र

7. नाग पहाड़ियाँ (अजमेर क्षेत्र)

  • स्थान: अजमेर जिला
  • विशेषता:
    • लूणी नदी तंत्र से संबंध
    • सर्पाकार (नागाकार) भू-आकृति
  • महत्व:
    • मध्य राजस्थान की स्थानीय पहाड़ी संरचना

8. गोगुंदा क्षेत्र की पहाड़ियाँ

  • स्थान: उदयपुर जिला
  • विशेषता:
    • बेड़च नदी का उद्गम क्षेत्र
    • ऐतिहासिक दृष्टि से महत्वपूर्ण
  • भू-रचना:
    • अरावली की प्राचीन चट्टानें

निष्कर्ष

राजस्थान का भूगोल विविधताओं से भरा हुआ है। अरावली की प्राचीन पर्वतमाला, उसके शिखर, भाकर जैसे स्थानीय पहाड़ी क्षेत्र और दक्षिण-पूर्व के उपजाऊ पठार — ये सभी मिलकर राज्य की भौगोलिक पहचान बनाते हैं।
यदि इनका अध्ययन स्पष्ट वर्गीकरण और सही तथ्यों के साथ किया जाए, तो परीक्षाओं में भूगोल एक मजबूत स्कोरिंग विषय बन सकता है।

राजस्थान का पर्वतीय एवं पठारी भूगोल – MCQ Practice Set

1. अरावली पर्वतमाला की दिशा क्या है?
A. उत्तर–दक्षिण
B. पूर्व–पश्चिम
C. उत्तर-पूर्व से दक्षिण-पश्चिम
D. दक्षिण-पूर्व से उत्तर-पश्चिम
उत्तर: C

2. अरावली पर्वतमाला किस प्रकार की पर्वतमाला है?
A. नवीन मोड़दार
B. ज्वालामुखीय
C. अपक्षयित प्राचीन
D. अवसादी
उत्तर: C

3. अरावली पर्वतमाला किन राज्यों/क्षेत्रों से होकर गुजरती है?
A. राजस्थान, पंजाब
B. राजस्थान, हरियाणा, दिल्ली, गुजरात
C. राजस्थान, मध्य प्रदेश
D. राजस्थान, उत्तर प्रदेश
उत्तर: B

4. अरावली पर्वतमाला का सर्वोच्च शिखर कौन-सा है?
A. सेर
B. जरगा
C. गुरु शिखर
D. अचलगढ़
उत्तर: C

5. गुरु शिखर की ऊँचाई लगभग कितनी है?
A. 1431 मीटर
B. 1597 मीटर
C. 1722 मीटर
D. 1800 मीटर
उत्तर: C

6. गुरु शिखर किस जिले में स्थित है?
A. उदयपुर
B. सिरोही
C. राजसमंद
D. पाली
उत्तर: B

7. अरावली का दूसरा प्रमुख ऊँचा शिखर कौन-सा माना जाता है?
A. अचलगढ़
B. सेर पहाड़ी
C. तोड़गढ़
D. नाग पहाड़ी
उत्तर: B

8. जरगा पहाड़ी किस क्षेत्र की सबसे ऊँची पहाड़ी है?
A. हाड़ौती
B. मालवा
C. मेवाड़
D. शेखावाटी
उत्तर: C

9. जरगा पहाड़ी किस जिले में स्थित है?
A. अलवर
B. चित्तौड़गढ़
C. उदयपुर
D. सिरोही
उत्तर: C

10. जरगा पहाड़ी की ऊँचाई लगभग कितनी है?
A. 851 मीटर
B. 1100 मीटर
C. 1431 मीटर
D. 1722 मीटर
उत्तर: C

11. भाकर शब्द किस भौगोलिक इकाई को दर्शाता है?
A. पठार
B. मैदान
C. पहाड़ी / पर्वतीय भाग
D. नदी घाटी
उत्तर: C

12. भाकर क्षेत्र मुख्यतः राजस्थान के किस भाग में पाया जाता है?
A. उत्तर-पूर्व
B. मध्य
C. दक्षिण-पश्चिम
D. पूर्व
उत्तर: C

13. निम्न में से कौन-सा भाकर क्षेत्र से संबंधित है?
A. बीजोलिया
B. जसवंतपुरा
C. हाड़ौती
D. डांग
उत्तर: B

14. भाकर क्षेत्रों में सबसे ऊँची चोटी कौन-सी है?
A. गुरु शिखर
B. जरगा
C. डोरा पर्वत
D. सेर
उत्तर: C

15. जालोर भाकर के उप-भाकर कौन-से हैं?
A. नाग, तारागढ़
B. रोजा, इसराना, झारोला
C. मोती, झालाना
D. बीजोलिया, डांग
उत्तर: B

16. राजस्थान का सबसे उपजाऊ पठार कौन-सा है?
A. मेवाड़
B. हाड़ौती
C. मालवा
D. डांग
उत्तर: C

17. चंबल नदी द्वारा कटा-फटा पठार कौन-सा है?
A. मेवाड़
B. बीजोलिया
C. हाड़ौती
D. विन्ध्य
उत्तर: C

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